यूजीसी नियमों पर न्यायालय की रोक: फैसला सनातन धर्म की रक्षा के लिए अहम : गिरिराज सिंह

0
cdfewsdsew

नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए हाल में अधिसूचित विवादास्पद नियमों पर उच्चतम न्यायालय की रोक का बृहस्पतिवार को स्वागत करते हुए दावा कि इसके प्रावधान सनातन धर्म को विभाजित करने वाले थे।

केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता ने कहा कि शीर्ष अदालत का फैसला भारत की सांस्कृतिक एकता और सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय परिसर में जाति आधारित भेदभाव को रोकने से संबंधित हालिया यूजीसी समानता विनियमन पर रोक लगा दी और कहा कि ये विनियम प्रथम दृष्टया ‘‘अस्पष्ट’’ प्रतीत होते हैं और इनका ‘‘दुरुपयोग’’ किए जाने की आशंका है।

शीर्ष अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि अगर इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया गया तो इसका खतरनाक प्रभाव पड़ेगा और समाज में विभाजन पैदा होगा।

केंद्रीय कपड़ा मंत्री ने इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए सोशल मीडिय मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘सनातन धर्म को विभाजित करने वाले यूजीसी नियमों पर रोक लगाने के लिए उच्चतम न्यायालय के प्रति हार्दिक आभार।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह निर्णय भारत की सांस्कृतिक एकता और सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।’’

बिहार के लोकसभा सदस्य सिंह ने कहा, ‘‘मोदी सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ और सनातन धर्म की अटूट एकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए जानी जाती है।’’

उच्चतम न्यायालय का यह आदेश उन विभिन्न याचिकाओं के बाद आया है जिनमें यह दलील दी गई थी कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने जाति-आधारित भेदभाव की ‘‘गैर-समावेशी’’ परिभाषा अपनाई है और कुछ श्रेणियों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा है।

इन नियमों के खिलाफ देश में विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए जिसमें छात्र समूहों और संगठनों ने इन्हें तत्काल वापस लेने की मांग की।

केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी करते हुए प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुझाव दिया कि प्रख्यात न्यायविदों की एक समिति द्वारा विनियमों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

पीठ ने कहा, ‘‘(केंद्र, यूजीसी को) नोटिस जारी करें और 19 मार्च तक जवाब दाखिल किए जाए। सॉलिसिटर जनरल नोटिस स्वीकार करें… तब तक यूजीसी विनियम 2026 स्थगित रहेंगे और 2012 के विनियम लागू रहेंगे।’’

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *