दांतों को अनदेखा न करें

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मसूड़े और दांत हमारे स्वास्थ्य के आईने हैं। कई बार उनका हाल देखने से ही पता चल जाता है कि मरीज को डायबिटिज है। डेंटल सर्जन के कहने से मरीज जांच करवाते हैं तो ज्ञात होता है ब्लड शुगर बढ़ी हुई है। इसी से डायबिटिज की पुष्टि होती है।
ब्लड शुगर बढ़ी रहने का मसूड़ों और दांतों के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। मसूड़ों में पायरिया हो जाता है जो जाने का नाम नहीं लेता। इसी प्रकार दांतों में कीड़ा लगने के मामले भी बहुत होते हैं। इसका ब्लड शुगर पर भी बुरा असर पड़ता है किन्तु जब तक शुगर नियंत्रित नहीं होती, तब तक डेंटल सर्जन को मसूड़ों और दांतों का इलाज करने में काफी मुश्किल होती है। लिहाजा एक तरफ डायबिटालोजिस्ट और दूसरी तरफ डेंटल सर्जन के यहां चक्कर काटने पड़ते हैं।
पायरिया:-
 यह मसूड़ों का रोग है। यह मसूड़ों और दांतों पर मैल की परत जमने से शुरू होता है। यह परत ही धीरे-धीरे सख्त होकर पत्थर जैसी बन जाती है। ऐसे में मसूड़े सूज जाते हैं तथा उनसे खून और मवाद आने लगता है। मुंह से दुर्गन्ध आती है। यदि समय रहते उसका इलाज नहीं हुआ तो दांतों के आसपास की हड्डी गलने लगती है। इससे दांत हिलने लगते हैं और गिर जाते हैं।
उपचार:-
यह रोग की अवस्था पर निर्भर करता है। आरंभिक अवस्था में मसूड़ों और दांतों की साफ सफाई से ही आराम आ जाता हैं। इसके अलावा डेंटल सर्जन मसूड़ों के नीचे एंटीसेप्टिक सोल्युशन की धार केन्द्रित कर भीतर जमा रोगाणुओं का सफाया कर सकता है। दांतों के ऊपरी छोर की सतह यदि असमतल हो गई हो तो उसे भी समतल बनाया जाता है ताकि रोगाणु जमा न हो सकें। स्थिति अधिक बिगड़ चुकी हो तो एंटीबायोटिक शुरू कर नीचे की हड्डी की सफाई और सुधार किए बिना बात नहीं बनती।
दांतों में कीड़ा लगना:-
 दांतों में कीड़ा मुंह की साफ-सफाई के प्रति लापरवाह रहने से लगता है। दांतों पर चिपके भोजन के कणों से लैक्टोबेसिलस बैक्टीरिया पैदा होते हैं। उनके प्रभाव से मुंह के भीतर तेजाब बन जाता है। तेजाब दांतों में छेद कर देता है। इससे दांत के भीतर की अति संवेदनशील नसों की कोटिंग हट जाती है और दांतों में दर्द होने लगता है।
उपचार:-
दांत में लगे कीड़े के इलाज के लिए एक तरफ एंटीबायोटिक और दूसरी तरफ सूजन और दर्द दूर करने वाली दवा लेने की जरूरत होती है। दांत अधिक गला न हो तो उसकी भीतर से पूरी सफाई यानी रूट केनाल करके भराई की जाती है। दांत बच जाए तो उसे मजबूत बनाने के लिए पोर्सलीन का खोल या डेंटल क्राउन चढ़ा दिया जाता है।
ऐसे करें देखभाल:-
हर सुबह उठने और हर रात सोने से पहले टुथब्रश जरूर करें। जब कभी कुछ खाएं, उसके बाद कुल्ला कर लें। मुंह साफ रहेगा तो उसमें न तो बैक्टीरिया पलेंगे, न डेंटल सर्जन के यहां दौड़ लगाने की जरूरत रहेगी। साल में कम से कम एक बार डेंटिस्ट से अपने मसूड़ों और दांतों की जांच जरूर कराएं। दांतों पर मैल चढ़ा हो तो डेंटल हाइजीनिस्ट से बेहिचक दांत साफ करा लें।