मेरे साहित्यिक कार्यों को मिली बड़ी पहचान: त्रिपुरा पद्म पुरस्कार विजेता नरेश चंद्र देव वर्मा

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अगरतला, 26 जनवरी (भाषा) प्रख्यात कोकबोरोक साहित्यकार नरेश चंद्र देव वर्मा ने सोमवार को कहा कि पद्म श्री पुरस्कार के लिए उनका चयन पांच दशकों तक फैली उनकी साहित्यिक यात्रा की मान्यता है।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार द्वारा घोषित 113 पद्म पुरस्कार विजेताओं में सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी देव वर्मा भी शामिल हैं।

उन्होंने सोमवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मैं यह दावा नहीं करता कि मैंने साहित्य के लिए, विशेष रूप से त्रिपुरा की 19 जनजातियों में से अधिकतर की भाषा कोकबोरोक में, पर्याप्त काम किया है, लेकिन मैंने आदिवासी भाषा में साहित्यिक कृतियों को पोषित करने के लिए अपनी पूरी कोशिश की।’’

देव वर्मा (81) का जन्म अविभाजित पश्चिम त्रिपुरा जिले के बिश्रामगंज नामक एक छोटे से गांव में हुआ था और कक्षा 10 की परीक्षा के बाद वह अगरतला आ गए थे।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की क्योंकि उस समय राज्य में कोई विश्वविद्यालय नहीं था। उसके बाद, मैं त्रिपुरा विधानसभा में सरकारी सेवा में शामिल होकर संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी के रूप में सेवानिवृत्त हुआ।’’

दो बेटियों के पिता ने 30 वर्ष की आयु में सरकारी नौकरी के साथ-साथ साहित्यिक कार्य शुरू किया था।

उन्होंने कहा, ‘‘50 वर्षों से अधिक समय तक फैले मेरे साहित्यिक कार्यों को कुछ साल पहले ही पहचान मिलनी शुरू हुई, जब मुझे कोकबोरोक और बांग्ला भाषा पर शोध में योगदान के लिए नौ सरकारी पुरस्कार मिले। 2024 में, मुझे राज्य सरकार के दूसरे सर्वोच्च पुरस्कार, प्रतिष्ठित त्रिपुरा भूषण से सम्मानित किया गया।’’

कोकबोरोक भाषा में 34 पुस्तकें लिख चुके देव वर्मा ने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि मेरी मेहनत को पद्म श्री पुरस्कार के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है।’’

कोकबोरोक भाषा की लिपि को लेकर जारी विवाद के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन कहा कि वह बांग्ला लिपि में कोकबोरोक पढ़ते और लिखते हैं।

मुख्यमंत्री माणिक साहा ने रविवार को सोशल मीडिया पर कहा, ‘‘नरेश चंद्र देव वर्मा जी को कोकबोरोक साहित्य और शिक्षा में उनके अनुकरणीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित पद्म श्री से सम्मानित किए जाने पर हार्दिक बधाई।’’

साहा ने कहा, ‘‘उनकी उत्कृष्ट सेवाओं को मान्यता देते हुए, त्रिपुरा सरकार ने उन्हें 2024 में त्रिपुरा भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया। त्रिपुरा को आप पर अत्यंत गर्व है।’’