करुणा के बिना कानून अत्याचार बन जाता है, कानून के बिना करुणा अराजकता : प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत

0
176395011514

पणजी, 25 जनवरी (भाषा) प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने रविवार को कहा कि करुणा के बिना कानून अत्याचार बन जाता है और कानून के बिना करुणा अराजकता का कारण बनती है।

नशीले पदार्थों के दुरुपयोग पर गोवा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के 30 दिन के विशेष जागरूकता अभियान के समापन समारोह को संबोधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यह समझना चाहिए कि मादक पदार्थों का दुरुपयोग केवल आपराधिक समस्या नहीं है, बल्कि सामाजिक, मनोवैज्ञानिक एवं चिकित्सकीय समस्या भी है, जिससे निपटने के लिए प्रतिशोधात्मक बयानबाजी नहीं, बल्कि परामर्शपूर्ण कार्रवाई की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों के दुरुपयोग पर महीने भर चला यह अभियान इस भावना को स्पष्ट रूप से दर्शाने में सफल रहा है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मैं विधि व्यवस्था और सामाजिक परिवर्तन के बीच महत्वपूर्ण अंतर्संबंध पर भी बात करना चाहूंगा। पिछले चार दशक में मैंने न्याय देने के हमारे तंत्र के विकास को देखा है। मैंने इसे यह पहचानते देखा है कि करुणा के बिना कानून अत्याचार बन जाता है और कानून के बिना करुणा अराजकता पैदा करती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ अभियान के तहत विद्यार्थियों को नीचा दिखाए बिना उनसे बात की गई। इस अभियान ने लोगों में डर पैदा किए बिना उन्हें जागरूक किया है।’’

नशे से उबर चुके युवाओं को दिखाने वाला एक वीडियो कार्यक्रम में प्रसारित किया गया। प्रधान न्यायाधीश ने इस वीडियो का उल्लेख करते हुए कहा कि इसने उन लोगों को आवाज दी है, जिन्हें समाज ने खारिज कर दिया था।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘नशे की लत की समस्या शोर या चेतावनी के साथ नहीं आती। यह हमारे घरों, कक्षाओं और समुदाय में चुपचाप प्रवेश करती है और संभावनाओं भरे भविष्य को खोखला कर देती है। नशीले पदार्थों का दुरुपयोग केवल व्यक्तियों को नहीं, बल्कि समाज को भी बर्बाद कर देता है।’’

उन्होंने गोवा के बारे में कहा कि राज्य की आत्मा केवल इमारतों और गली-मोहल्लों में नहीं, बल्कि हर नागरिक और निवासी में समाई है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘यही गोवा के मायने हैं-संरक्षण, विरासत और अपनी पहचान पर गर्व।’’

यहां कला अकादमी में आयोजित कार्यक्रम में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह के साथ-साथ बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर भी शामिल थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *