‘पार्टी लाइन’ का कभी उल्लंघन नहीं किया, ऑपरेशन सिंदूर पर अपने रुख पर खेद नहीं: शशि थरूर

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कोझिकोड (केरल), जनवरी 24 (भाषा) कांग्रेस नेता एवं सांसद शशि थरूर ने शनिवार को कहा कि उन्होंने संसद में पार्टी के घोषित रुख का कभी उल्लंघन नहीं किया और किसी भी आंतरिक मतभेद पर संगठन के भीतर ही चर्चा की जानी चाहिए, न कि मीडिया के माध्यम से।

कुछ खबरों में दावा किया गया है कि थरूर के पार्टी नेतृत्व से मतभेद हैं और वह इस बात से ‘‘आहत’’ हैं कि राहुल गांधी ने हाल में कोच्चि में एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर उनके मौजूद होने के बावजूद उनके नाम का उल्लेख नहीं किया तथा राज्य के नेताओं द्वारा बार-बार उन्हें ‘‘दरकिनार’’ करने की कोशिश की जा रही है।

थरूर ने कहा, ‘‘मैं बस इतना ही कह सकता हूं कि कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें मुझे सार्वजनिक मंच पर नहीं बल्कि अपनी पार्टी के नेतृत्व के समक्ष उठाना होगा… मैं संसद सत्र के लिए दिल्ली जाऊंगा और मुझे विश्वास है कि मुझे पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी चिंताओं को स्पष्ट रूप से रखने और उनका दृष्टिकोण जानने का अवसर मिलेगा… मुझे उचित तरीके से बातचीत करने का मौका मिलेगा।’’

उन्होंने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘मैं पिछले 17 साल से कांग्रेस में हूं। इस मुद्दे को ज्यादा आगे नहीं बढ़ाते हैं… जहां तक ​​मेरा सवाल है, जो कुछ भी गलत हुआ है, उससे निपटने की जरूरत है और इस पर उचित मंच पर चर्चा की जाएगी।’’

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने केरल विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा के लिए शुक्रवार को राज्य से जुड़े वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की थी लेकिन थरूर इसमें शामिल नहीं हुए थे।

तिरुवनंतपुरम के सांसद ने यहां पत्रकारों से कहा कि उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को पार्टी की बैठक में शामिल न हो पाने की अपनी असमर्थता के बारे में सूचित कर दिया था।

उन्होंने कहा कि उनके बारे में कुछ खबरें सही हो सकती हैं, जबकि अन्य गलत हो सकती हैं।

थरूर ने कहा कि वह एक साहित्य उत्सव में भाग लेना चाहते थे और लगातार यात्रा करना उनके लिए मुश्किल था।

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, मैं संसद में पार्टी की सभी गतिविधियों में अवश्य भाग लूंगा और मैं उस समय पार्टी नेतृत्व से मिल सकता हूं।’’

थरूर ने कहा कि जिन मामलों पर पार्टी के भीतर चर्चा होनी चाहिए, उन पर आंतरिक रूप से ही बात की जानी चाहिए, न कि मीडिया के माध्यम से।

कोच्चि में एक पार्टी कार्यक्रम में उनके साथ कथित अनुचित व्यवहार के बारे में पूछे गए सवाल पर थरूर ने कहा कि वह इस पर टिप्पणी नहीं करेंगे।

उन्होंने कहा कि वह साहित्य उत्सव में श्री नारायण गुरु पर अपनी पुस्तक प्रदर्शित करना चाहते थे।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि राजनीतिक व्यस्तता के कारण वह एक बार जयपुर साहित्य उत्सव में शामिल नहीं हो पाए थे।

इससे पहले, यहां केरल साहित्य उत्सव के एक सत्र के दौरान सवालों का जवाब देते हुए थरूर ने कहा कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर पर कड़ा रुख अपनाया था और उन्हें इसका ‘‘खेद नहीं’’ है।

थरूर ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि एक पर्यवेक्षक, टिप्पणीकार और लेखक के रूप में उन्होंने पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद एक अखबार में स्तंभ लिखा था जिसमें कहा गया था कि इसकी सजा दी जानी चाहिए और इस पर ठोस कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, ऐसे में उसे पाकिस्तान के साथ लंबे टकराव में नहीं पड़ना चाहिए और कोई भी कार्रवाई आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाने तक सीमित होनी चाहिए।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि उन्हें आश्चर्य हुआ कि भारत सरकार ने ठीक वही किया जैसा ‘‘मैंने कहा था’’।

उन्होंने कहा, ‘‘जब मैंने खुद इसकी सिफारिश की थी तो मुझसे इसकी आलोचना की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। मैंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और उसके बाद भी इसका पूरी तरह समर्थन किया।’’

थरूर ने कहा कि जब सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर उन्हें बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में विदेश भेजा तो उनकी पार्टी को किसी कारण से यह पसंद नहीं आया।

उन्होंने कहा, ‘‘आप उनसे बात कर सकते हैं और पता कर सकते हैं।’’

थरूर ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ही यह प्रश्न किया था कि ‘‘अगर भारत खत्म हो जाएगा तो कौन जीवित रहेगा?’’

उन्होंने कहा, ‘‘जब भारत दांव पर हो, जब भारत की सुरक्षा और दुनिया में उसका स्थान दांव पर हो तो भारत पहले आता है।’’

कांग्रेस सांसद ने कहा कि बेहतर भारत के निर्माण की प्रक्रिया के तहत राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हो सकते हैं लेकिन जब राष्ट्रहित की बात आती है तो भारत को ही सर्वोपरि होना चाहिए।

अप्रैल 2025 में जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी थी जिसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया जिसके तहत पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचों को निशाना बनाया गया।

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