भारत अगले पांच वर्षों में छह-आठ प्रतिशत की दर से बढ़ता रहेगाः वैष्णव

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दावोस, 21 जनवरी (भाषा) केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि मुद्रास्फीति में नरमी और मजबूत आर्थिक वृद्धि के बल पर भारतीय अर्थव्यवस्था अगले पांच वर्षों में वास्तविक रूप से छह-आठ प्रतिशत और मौजूदा कीमतों पर 10-13 प्रतिशत की दर से बढ़ती रहेगी।

वैष्णव ने यहां विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक के इतर आयोजित ‘बेट ऑन इंडिया – बैंक ऑन द फ्यूचर’ सत्र को संबोधित करते हुए अनुमति प्रक्रियाओं के सरलीकरण के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि दूरसंचार टावर स्थापित करने में लगने वाला औसत समय 270 दिनों से घटकर सात दिन रह गया है और 89 प्रतिशत अनुमतियां अब तुरंत मिल रही हैं।

वैष्णव ने नीति के उद्देश्य और जमीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि राजनीतिक नेतृत्व के रूप में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि नौकरशाही राजनीतिक निर्णयों के अनुरूप काम करे।

उन्होंने उद्योग जगत के बीच चुनौतियों के प्रभावी संवाद की आवश्यकता का भी उल्लेख किया और अमेरिका एवं यूरोप में डेटा स्थानीयकरण मानकों के मानकीकरण का उदाहरण दिया।

इस अवसर पर भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष और ईवाई अफ्रीका-भारत क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंध साझेदार राजीव मेमानी ने कहा कि भारत प्रति व्यक्ति आय के मामले में सबसे निचली श्रेणी का हिस्सा है जो दर्शाता है कि 2047 तक इसे कम-से-कम पांच गुना बढ़ाने की जरूरत है।

उन्होंने भारत की व्यापार रणनीति का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया, एशिया-प्रशांत क्षेत्र और ब्रिटेन जैसे क्षेत्रों के साथ व्यापार समझौते तेजी से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने जीएसटी दर कटौती और नए श्रम कानून लागू करने जैसे प्रमुख सुधारों का भी जिक्र किया।

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, “जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता और तेज तकनीकी बदलावों से गुजर रही है, ऐसे समय में भारत एक बड़े पैमाने, स्थिरता और दीर्घकालिक अवसरों वाले बाजार के रूप में उभरा है।”

इस गोलमेज बैठक में वैश्विक वित्त और बैंकिंग, बीमा एवं पुनर्बीमा, प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म, औद्योगिक स्वचालन, परिवहन एवं आवाजाही, दूरसंचार, साइबर सुरक्षा, चिकित्सा प्रौद्योगिकी, जीवन विज्ञान, खाद्य एवं पेय, रसायन और उपभोक्ता वस्तुएं, स्वच्छ ऊर्जा समाधान तथा सीमा-पार भुगतान जैसे क्षेत्रों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

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