चालू वित्त वर्ष में 7.3 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि से औसत घरेलू आय को सहारा,बीमा की मांग बढ़ेगी:मूडीज

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नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) रेटिंग एजेंसी मूडीज ने चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर के 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है जिससे मजबूत आर्थिक विस्तार से औसत घरेलू आय को समर्थन मिलेगा और बीमा मांग मजबूत होगी।

भारत के बीमा क्षेत्र पर जारी अपनी रिपोर्ट में मूडीज ने कहा कि उद्योग को प्रीमियम में निरंतर वृद्धि का लाभ मिलने की संभावना है जो मजबूत आर्थिक विस्तार, बढ़ते डिजिटलीकरण, कर बदलावों और प्रमुख सरकारी स्वामित्व वाले बीमा क्षेत्र में प्रस्तावित सुधारों से प्रेरित होगी। इससे उद्योग की वर्तमान में कमजोर लाभप्रदता में सुधार आने की उम्मीद है।

मूडीज ने कहा, ‘‘ हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, जो पिछले वित्त वर्ष के 6.5 प्रतिशत से अधिक है। इससे औसत आय में वृद्धि होगी और बीमा की मांग को समर्थन मिलेगा।”

वित्त वर्ष 2024-25 में प्रति व्यक्ति जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) सालाना आधार पर 8.2 प्रतिशत बढ़कर 11,176 अमेरिकी डॉलर रही जबकि कुल जीडीपी वृद्धि 6.5 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

मूडीज के अनुसार, भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि से वित्त वर्ष 2025-26 के पहले आठ महीनों (अप्रैल-नवंबर) में कुल बीमा प्रीमियम आय 17 प्रतिशत बढ़कर 10.9 लाख करोड़ रुपये हो गई। इस दौरान स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम में 14 प्रतिशत और जीवन बीमा के नए कारोबार के प्रीमियम में 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

यह वृद्धि वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में तेज रही जब कुल प्रीमियम सात प्रतिशत बढ़कर 11.9 लाख करोड़ रुपये रहा।

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि प्रीमियम आय में वृद्धि भारतीय उपभोक्ताओं में जोखिम के प्रति बढ़ती जागरूकता और देश की अर्थव्यवस्था के लगातार हो रहे डिजिटलीकरण को भी दर्शाती है। डिजिटलीकरण से बीमा उत्पादों का वितरण और बिक्री आसान होती है जिससे वे अधिक सुलभ बनते हैं। यह बीमा नियामक के ‘2047 तक सभी के लिए बीमा’ के लक्ष्य के अनुरूप है।

मूडीज ने कहा कि सरकार देश की सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों की लाभप्रदता सुधारने का लक्ष्य रखती है जिनका बाजार पर बड़ा प्रभाव है। सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में अल्पांश हिस्सेदारी बेची है और कुछ सरकारी कंपनियों को पूंजी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा है, बशर्ते वे अपनी ‘अंडरराइटिंग’ क्षमता में सुधार करें। अन्य प्रस्तावित उपायों में सरकारी बीमा कंपनियों के विलय या निजीकरण की संभावना भी शामिल है।

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भारतीय बीमा कंपनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा को 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने से उन्हें अतिरिक्त वित्तीय मजबूती मिलेगी।

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