डेलॉयट ने आगामी बजट में एमएसएमई निर्यात के लिए ऋण बढ़ाने का दिया सुझाव

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नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में व्यापारिक स्थिरता बढ़ाने एवं बाहरी कमजोरियों को कम करने के लिए निर्यात ऋण तथा रियायती वित्तपोषण के माध्यम से छोटे उद्यमों को समर्थन देने के साथ-साथ महत्वपूर्ण खनिजों की खोज के लिए वित्तपोषण जैसे उपायों पर विचार किया जाना चाहिए। वित्तीय परामर्श एवं सलाहकार कंपनी डेलॉयट इंडिया ने यह बात कही।

डेलॉयट ने बजट को लेकर अपनी आकांक्षाओं पर कहा कि भारत के निर्यात में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) का 46 प्रतिशत हिस्सा है और कृषि के बाद ये दूसरे सबसे बड़े नियोक्ता हैं। वित्तीय एवं अनुपालन संबंधी दबावों को कम करने से इन उद्यमों को वैश्विक अस्थिरता से निपटने, उत्पादन बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद मिलेगी।

कंपनी ने कहा, ‘‘ एमएसएमई को मजबूत करने से रोजगार सुरक्षित होंगे और समावेशी आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी, ग्रामीण आय में वृद्धि होगी तथा भारत की वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की महत्वाकांक्षा को समर्थन मिलेगा।’’

डेलॉयट ने अंतिम छोर तक एमएसएमई की प्रतिस्पर्धा को बेहतर बनाने और सरलीकृत डिजिटल प्रक्रियाओं के माध्यम से अनुपालन बोझ को कम करने के लिए व्यापक प्रशिक्षण का सुझाव दिया।

इसने यह भी सुझाव दिया कि शुल्क के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों (तैयार वस्त्र, रत्न, आभूषण, चमड़ा) को लक्षित निर्यात प्रोत्साहन या बढ़ी हुई शुल्क छूट प्रदान की जाए।

डेलॉयट की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा कि बढ़ते वैश्विक संरक्षणवाद एवं तदर्थ उपायों (शुल्क में बढ़ोतरी, उत्पत्ति नियमों में बदलाव एवं गैर-शुल्क बाधाएं) से भारतीय निर्यातकों के लिए अनिश्चितता बढ़ जाती है। वैश्विक व्यापारिक टकरावों का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि पर प्रत्यक्ष प्रभाव 0.40 प्रतिशत से 0.80 प्रतिशत तक सीमित हो सकता है लेकिन एमएसएमई और रोजगार पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।’’

महत्वपूर्ण खनिजों को सुरक्षित करने और वैकल्पिक ऊर्जा आपूर्ति तक पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से डेलॉयट ने विदेशी अधिग्रहण एवं प्रौद्योगिकी सहयोग को वित्तपोषित करने के लिए एक समर्पित महत्वपूर्ण खनिज कोष के आवंटन का सुझाव दिया।

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