धर्म के नाम पर शांति भंग करने वालों के खिलाफ संघर्ष में कला भी एक प्रभावी हथियारः विजयन

0
xsdwqssde3wdsx

त्रिशूर, 14 जनवरी (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने बुधवार को कहा कि कला का उद्देश्य केवल आनंद देना नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे जीवन के “कष्टदायक अनुभवों” के प्रति लोगों को जागरूक करना चाहिए और धर्म के नाम पर शांति और खुशहाली को नष्ट करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ संघर्ष करना चाहिए।

विजयन यहां 64वें केरल स्कूल कलोलसवम (कला उत्सव) का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे। यहां 24 स्थानों पर आयोजित होने वाले 249 कार्यक्रमों में करीब 14000 छात्र भाग लेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अतीत में सामंती व्यवस्था और उस समय प्रचलित छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों के कारण विभिन्न कला रूप एक विशेष जाति या धर्म तक ही सीमित थे।

उन्होंने कहा, ”सामंतवाद के अंत और लोकतंत्र तथा धर्मनिरपेक्षता पर आधारित नए युग के उदय के साथ कला का स्वरूप बदल गया। सभी कलाएं जन जन की हो गईं। कला ने धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र को जीवंत रूप दिया। इसमें स्कूल कला महोत्सवों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही।”

मुख्यमंत्री ने त्रिशूर जिले के महान गायक कलामंडलम हैदरअली का जिक्र करते हुए कहा कि कलाकार को अपने धर्म के कारण कुछ “दुर्भाग्यपूर्ण अनुभवों” का सामना करना पड़ा था।

विजयन ने छात्रों, अभिभावकों और केंद्रीय पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी सहित गणमान्य व्यक्तियों की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, “किसी अन्य धर्म में जन्म लेने के कारण अपमानित किया जाना लोकतांत्रिक समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।”

अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्य धर्मों के लोगों के अनुभवों को आत्मसात करने की व्यापक सोच ही हमें “सभ्य और सुसंस्कृत” बनाती है।

उन्होंने कहा, अब कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कला को किसी विशेष धर्म तक सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे लोग समस्याएं पैदा करने के लिए यह तर्क देते हैं कि मुसलमानों को भरतनाट्यम नहीं सीखना चाहिए और हिंदुओं को ओप्पना में भाग नहीं लेना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में बच्चों द्वारा गाए जाने वाले क्रिसमस कैरोल तक पर हमले किए गए। कुछ स्थानों पर क्रिसमस की छुट्टियां समाप्त कर दी गईं। सांप्रदायिक तत्व धर्म के नाम पर कहीं भी दंगे भड़काने की कोशिश करते रहेंगे।

उन्होंने कहा, “स्थिति इस हद तक पहुंच रही है कि अब फिल्मों के पात्रों के नाम भी जानकी, सीता आदि रखने की अनुमति नहीं दी जा रही है। शांति और खुशहाली को नष्ट करने वाले ऐसे दंगाइयों के खिलाफ संघर्ष में कला भी एक प्रभावी हथियार है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी को ऐसे प्रयासों को पूरी तरह नज़रअंदाज़ करना चाहिए और जाति या धर्म की परवाह किए बिना कला को सामने लाना चाहिए।

विजयन ने कहा, “कला का उद्देश्य अच्छे इंसान बनाना है। कला का उपयोग किसी और चीज के लिए नहीं किया जाना चाहिए।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *