अमेरिका में ‘अंधेरे का दौर’, मेरी किताब लोगों को जुड़ने के लिए करेगी प्रेरित: पद्मा लक्ष्मी

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न्यूयॉर्क, 14 जनवरी (भाषा) भारतीय-अमेरिकी टेलीविजन हस्ती और पाक कला विशेषज्ञ पद्मा लक्ष्मी ने कहा कि अमेरिका में मौजूदा वक्त ‘‘अंधकारमय’’ है और साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी नयी किताब ऐसे समय में अलग-अलग समुदायों के लोगों को एक-दूसरे के प्रति जिज्ञासा जगाने, संवाद करने और जुड़ने के लिए प्रेरित करेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि यह दौर शायद और भी ‘‘अंधकारमय हो जाएगा’’, फिर अंत में रोशनी की किरण दिखाई देगी।

पाक कला पर लक्ष्मी की नवीनतम पुस्तक ‘पद्माज़ ऑल अमेरिकन: टेल्स, ट्रेवल्स, एंड रेसिपीज़ फ्रॉम टेस्ट द नेशन एंड बियॉन्ड’ अमेरिका की समृद्ध पाक कला और प्रवासी विविधता का संग्रह है।

अमेरिका और दुनिया के अन्य हिस्सों में प्रवासियों के विरोध की बढ़ती भावना के समय में, लक्ष्मी ने आशा व्यक्त की है कि उनकी नयी पुस्तक लोगों में अन्य समुदायों के प्रति जिज्ञासा जगाएगी और उन्हें अन्य संस्कृतियों और देशवासियों से जुड़ने तथा संपर्क स्थापित करने में सक्षम बनाएगी।

लक्ष्मी ने पिछले महीने यहां ‘एशिया सोसाइटी’ में ‘द कल्चर ट्री’ के साथ साझेदारी में आयोजित एक वार्ता के दौरान कहा, ‘‘हमारा देश इस समय एक बहुत ही अंधकारमय दौर से गुजर रहा है और मुझे यह कहते हुए खेद हो रहा है कि प्रकाश वापस आने से पहले शायद यह और भी अंधकारमय होगा।’’

यह पूछे जाने पर कि वह अपनी नई किताब से लोगों को क्या सीख देना चाहती हैं, तो लक्ष्मी ने उम्मीद जताई कि यह किताब लोगों को ‘‘अपने साथी अमेरिकियों, अपने कंबोडियाई अमेरिकियों, पेरू के अमेरिकियों, अपने नाइजीरियाई अमेरिकियों के बारे में अधिक जिज्ञासु बनाएगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी एक बहुत ही विविधतापूर्ण देश में रहते हैं, खासकर न्यूयॉर्क में जहां सड़क के आर-पार रहने वाले लोग अलग-अलग भाषा बोलते हैं, अलग-अलग तरह के भोजन करते हैं, अलग-अलग ईश्वर की पूजा करते हैं और अक्सर इन्हीं भिन्नताओं के कारण हम सड़क के उस पार नहीं जाते, उनसे जान-पहचान नहीं करते।’’

उन्होंने ‘द कल्चर ट्री’ की संस्थापक और सीईओ अनु सहगल से बातचीत में कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि आप लोग सारे ‘प्रोफाइल’ पढ़ने के लिए समय निकालेंगे क्योंकि मैं कुछ असाधारण लोगों से मिली, आम लोग लेकिन असाधारण कहानियां। और मैं चाहती हूं कि हम एक-दूसरे को और बेहतर तरीके से जानें, ताकि हम एक-दूसरे से और अधिक बातचीत कर सकें।’’

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