गुवाहाटी, 13 जनवरी (भाषा) असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य और मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मंगलवार को भोगली बिहू और उरुका के अवसर पर राज्य के लोगों को शुभकामनाएं दीं।
असम के राज्यपाल आचार्य ने कहा कि फसल कटाई के मौसम के समापन पर मनाया जाने वाला भोगली बिहू समृद्धि, कृतज्ञता और सामूहिकता का जीवंत उत्सव है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह बिहू हमें जाति, पंथ, भाषा और धर्म की बाधाओं को पार करते हुए साझा करने, दावत देने और सामूहिक आनंद की सच्ची भावना से एक साथ आने का अवसर देता है।’’
आचार्य ने कहा कि माघ बिहू जैसे त्योहार लोगों को प्रकृति का पोषण करके विकास को अपनाते हुए सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने के महत्व की याद दिलाते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरी कामना है कि माघ बिहू हर घर में खुशी, अच्छा स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि लाए और हम सभी को आत्मनिर्भर असम के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रेरित करे।’’
शर्मा ने कहा कि यह परिवारों के एक साथ आने और उत्साहपूर्वक जश्न मनाने का समय है।
तीन दिवसीय उत्सव की शुरुआत उरुका नामक भोज से होती है जहां समुदाय अपनी फसल की कटाई का जश्न मनाने के लिए एक साथ खाना पकाते और खाते हैं।
उत्सव का एक मुख्य आकर्षण ‘भेलाघर’ होता है, जिन्हें बड़ी मेहनत से बनाया जाता है। ये भूसे और बांस से बनी संरचनाएं होती हैं जिसमें मानव-हाथी संघर्ष से लेकर ऐतिहासिक स्मारकों तक विभिन्न विषयों को दर्शाया जाता है।
इन्हीं ढांचों के अंदर और आसपास सामुदायिक भोज आयोजित किए जाते हैं। अगले दिन अग्नि देवता को प्रसन्न करने के अनुष्ठान के रूप में इन ढांचों को ‘मेजिस’ (घास और बांस से बने बेलनाकार ढांचे) के साथ जला दिया जाता है।