त्रिशूर (केरल), 13 जनवरी (भाषा) केरल में स्कूल कला महोत्सव के आयोजन स्थलों के नाम फूलों के आधार पर रखे जाने को लेकर उठे विवाद पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने मंगलवार को सवाल उठाया कि शुरुआत में किसी भी स्थल का नाम ‘कमल’ पर क्यों नहीं रखा गया और फूल के नाम को राजनीति से क्यों जोड़ा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने आयोजकों को किसी स्थल का नाम ‘थमारा’ (कमल) रखने से रोककर उन्हें गुमराह किया।
बताया जाता है कि 24 केरल स्कूल कलोलसवम (कला महोत्सव) के सभी स्थलों के नाम फूलों पर रखे गए थे, लेकिन उनमें ‘कमल’ का नाम शामिल नहीं होने को लेकर भारतीय जनता पार्टी और उसके युवा संगठन ने विरोध प्रदर्शन किया था।
इन विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार ने कथित तौर पर एक स्थल का नाम बदलकर ‘थमारा’ कर दिया।
पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और पर्यटन राज्य मंत्री गोपी ने 14 से 18 जनवरी तक त्रिशूर में आयोजित हो रहे ‘कलोलसवम’ के दौरान संवाददाताओं से बातचीत में पूछा कि कमल जैसे फूल के नाम को राजनीति से क्यों जोड़ा जाए?
वह स्थल के नाम को लेकर उठे विवाद और उसका नाम ‘थमारा’ रखे जाने संबंधी सवाल का जवाब दे रहे थे।
उन्होंने कहा, “कमल राष्ट्रीय फूल है। यह गुलाब की तरह ही एक फूल है। हम इसमें राजनीति कैसे देख सकते हैं? यह पूजा में इस्तेमाल होने वाला फूल है। तालाब में खिले कमल को देखकर किसी को उसे जलाने का विचार नहीं आता, बल्कि हम उससे प्रेम करते हैं। अगर हम उसे प्रेम से देखें तो वह सुंदर लगता है। अगर कोई उसे राजनीतिक नजर से देखता है तो यह देखने वाले की समस्या है।”
गोपी ने कहा कि किसी ने आयोजकों को कमल का नाम शामिल न करने के लिए गुमराह किया होगा। उन्होंने कहा, “अन्यथा मंत्री को दोबारा निर्णय लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती। मैं इसे ‘सुधार’ नहीं बल्कि ‘पुनः निर्णय’ कहूंगा। मैं इसे इसी तरह देखता हूं।”