पीएचडी चैंबर का छोटे उद्योगों के लिए ब्याज सब्सिडी योजना दोबारा लाने का सुझाव

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नयी दिल्ली, सात जनवरी (भाषा) आगामी केंद्रीय बजट के लिए उद्योग मंडल पीएचडीसीसीआई ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को राहत देने के लिए ब्याज सब्सिडी योजना को फिर से शुरू करने और ‘मुद्रा’ ऋणों की सीमा बढ़ाने जैसे प्रमुख उपायों के सुझाव दिए हैं।

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचीसीसीआई) ने कहा कि ये सुझाव एमएसएमई की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने, उन पर नियामकीय बोझ कम करने और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से दिए गए हैं।

उद्योग मंडल ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से लिए जाने वाले नए और अतिरिक्त ऋणों पर दो प्रतिशत ब्याज सब्सिडी के साथ ब्याज अनुदान योजना को फिर से शुरू करने की सिफारिश की है। उसका तर्क है कि कम ब्याज दरों से ऋण चुकाने में अनुशासन सुधरेगा और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।

इसके अलावा, संगठन ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के तहत दिए जाने वाले कर्जों की सीमा बढ़ाने का भी सुझाव दिया है। इसके तहत ‘शिशु’ श्रेणी में ऋण सीमा को 50 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये और ‘किशोर’ श्रेणी में इसे पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की मांग की गई है।

पीएमएमवाई के तहत ‘शिशु’, ‘किशोर’, ‘तरुण’ और ‘तरुण प्लस’ श्रेणियां लाभार्थी उद्यमों की विकास अवस्था और वित्तीय जरूरतों को दर्शाती हैं।

पीएचडीसीसीआई ने स्टार्टअप फर्मों के लिए कोषों का कोष के जरिये इक्विटी निवेश बढ़ाने, एमएसएमई सुविधा परिषदों का दायरा मध्यम उद्यमों तक बढ़ाने और हरित एवं आधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए ऋण-संबद्ध पूंजी सब्सिडी योजना की निवेश सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर दो करोड़ रुपये करने की भी सिफारिश की है।

इसके साथ ही, उद्योग संगठन ने 10 करोड़ रुपये तक के वार्षिक कारोबार वाले सूक्ष्म उद्यमों को अनिवार्य कर ऑडिट से छूट देने की मांग की है, जिससे अनुपालन लागत में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद जताई गई है।

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