चाय कंपनियों ने श्रमिकों को भू-अधिकार देने को लेकर असम सरकार से वार्ता की मांग की

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गुवाहाटी, छह जनवरी (भाषा) चाय कंपनियों ने असम सरकार से अपील की है कि वह संशोधित भूमि सीमा अधिनियम के कार्यान्वयन से बागान मालिकों पर पड़ने वाले वित्तीय और कानूनी प्रभावों का निराकरण करे। बागान मालिकों ने यह जानकारी दी।

इस संशोधित अधिनियम के तहत श्रमिकों को बागान क्षेत्रों के भीतर घर बनाने के लिए भू-अधिकार प्रदान किए जाएंगे।

एक उद्योग सूत्र ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि चाय बागान मालिकों ने सरकार की इस पहल का स्वागत किया, लेकिन उन्होंने ‘‘बागानों के भीतर मजदूरों को भूमि स्वामित्व प्रदान करने में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने’’ के लिए चर्चा की मांग की।

उन्होंने कहा कि बागान मालिक, मजदूर क्वार्टर की जमीन मजदूरों को हस्तांतरित करने के विरूद्ध नहीं हैं लेकिन आशंकाओं और कानूनी चुनौतियों का समाधान करना होगा।

बागान मालिक ने कहा, ‘‘सरकार को नए कानून को लागू करने के लिए चाय कंपनियों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए। हमारी बस यही एक गुजारिश है।’’

चाय उत्पादक संगठनों के गठबंधन ‘कंसल्टेटिव कमेटी ऑफ प्लांटेशन एसोसिएशंस (सीसीपीए)’ ने बागान क्षेत्रों के भीतर श्रमिकों को स्थायी आधार पर भूमि अधिकार प्रदान करने में आने वाली चुनौतियों के बारे में राज्य सरकार को पहले ही पत्र लिखा है।

सीसीपीए के सदस्य और ‘टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (टीएआई)’ के अध्यक्ष संदीप सिंघानिया ने भी नए कानून से संबंधित मुद्दों पर कंपनियों के साथ चर्चा करने पर जोर दिया है।

असम विधानसभा ने नवंबर में असम भूमि जोत सीमा निर्धारण (संशोधन) अधिनियम, 2025 पारित किया था, जिससे सरकार को चाय बागानों की श्रमिक बस्तियों में श्रमिकों के बीच आवास के लिए भूमि वितरित करने की सुविधा मिलेगी।

असम में 825 चाय बागान हैं और श्रमिक बस्तियों के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र लगभग 2,18,553 बीघा (72,248 एकड़) है, जिससे इस अधिनियम से 14 लाख से अधिक लोगों को लाभ होगा।

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