केरल: उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद शिक्षकों के लिए ‘के-टेट’ के नए दिशा-निर्देश जारी

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तिरुवनंतपुरम, दो जनवरी (भाषा) केरल सरकार ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता पर उच्चतम न्यायालय के हालिया फैसलों के बाद सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में नियुक्तियों और पदोन्नति के लिए नये ‘के-टेट’ दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

यह निर्णय उच्चतम न्यायालय के सात, अगस्त 2023 और एक, सितंबर 2025 के आदेशों के मद्देनजर लिया गया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सामान्य शिक्षा निदेशक से स्पष्टीकरण मांगने और मामले की विस्तृत समीक्षा के बाद ही ये संशोधित नियम जारी किए गए हैं।

नये नियमों के अनुसार, के-टेट श्रेणी-1 या श्रेणी-2 उत्तीर्ण करने वाले उम्मीदवार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र बने रहेंगे, जबकि के-टीईटी श्रेणी-3 उत्तीर्ण उम्मीदवारों को केवल माध्यमिक विद्यालय शिक्षक पदों के लिए योग्य माना जाएगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि माध्यमिक विद्यालय के भाषा शिक्षकों के पास के-टीईटी श्रेणी-3 और श्रेणी-4 दोनों योग्यताएं होनी चाहिए।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि हाई स्कूल के भाषा शिक्षकों के पास के-टेट श्रेणी-3 और श्रेणी-4, दोनों योग्यताएं होनी अनिवार्य हैं।

एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत, अब तक ‘सेट’, ‘नेट’, ‘एम फिल’, ‘पीएचडी’ या ‘एमएड’ जैसी उच्च योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों को के-टेट से मिलने वाली छूट वापस ले ली गई है और अब उन्हें भी संबंधित श्रेणी की के-टेट परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।

पदोन्नति के संबंध में सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं कार्यरत माध्यमिक विद्यालय शिक्षकों के नाम पर प्रधानाध्यापक पद के लिए विचार किया जाएगा, जिनके पास के-टीईटी श्रेणी-3 की योग्यता होगी। इसके अलावा, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शिक्षक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शिक्षक (कनिष्ठ) के पदों पर तबादले के जरिए होने वाली नियुक्तियों के लिए भी यही योग्यता अनिवार्य होगी।

केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटेट) उत्तीर्ण करने वाले उम्मीदवारों को मिलने वाली मौजूदा छूट जारी रहेगी। इसके तहत, सीटेट का प्राथमिक स्तर उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थी प्राथमिक शिक्षक के पदों के लिए पात्र होंगे, जबकि प्रारंभिक स्तर (एलिमेंट्री) की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले उम्मीदवारों को उच्च प्राथमिक शिक्षक के पदों के लिए योग्य माना जाएगा।

राज्य सरकार ने साफ किया है कि ये नये दिशा-निर्देश वर्तमान में लागू रहेंगे, लेकिन ये उच्चतम न्यायालय में लंबित पुनर्विचार याचिका के अंतिम फैसले के अधीन होंगे।

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