लौह तत्व की कमी से व्यक्ति में संज्ञानात्मक अक्षमताएं पैदा होने के अलावा उसके सामाजिक एवं भावनात्मक विकास में बाधा आती है तथा अनीमिया जैसी घातक बीमारी भी हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आयोडीन एवं विटामिन ए की तरह ही शरीर में लौह तत्व की आपूर्ति भी आवश्यक है क्योंकि लौह तत्व से होने वाली अनेक बीमारियों से बचाती है। लौह तत्व की कमी से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ जाती है तथा रूग्णता में वृद्धि और धातु जनित विषाक्तों के प्रति ग्रहणशीलता बढ़ती है।
धूम्रपान से ब्रेन अटैक का खतरा
अमेरिकी शोधकर्ताओं के अनुसार धूम्रपान करने से दिमाग की नसों में सिकुड़न होने लगती है तथा ब्रेन हैमरेज व ब्रेन अटैक का खतरा मंडरा सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार जब कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है तो सिगरेट के धुएं से उत्पन्न कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन बन जाती है और रक्त में मिल जाती है। इससे नलिकाएं सिकुड़ती हैं। इसके अलावा धूम्रपान से पुरूषों में नपुंसकता व महिलाओं में बांझपन भी हो सकता है।
हृदय के लिए लाभदायक है चाय
अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के चिकित्सकों द्वारा किये गए शोध के अनुसार चाय में एन्टीऑक्सीडेन्ट पाये जाते हैं जो हृदय की कोशिकाओं का ऑक्सीजन से होने वाली हानि से बचाव करते हैं। चाय का सेवन रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को नियंत्रित रखता है। थक्के अधिक बनने के कारण हृदयाघात या हार्टअटैक की संभावना बन जाती है। यह रक्त में एन्टीऑक्सीडेंट की मात्रा को बढ़ाती है, अतः चाय थकावट को दूर करने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक मानी जाती है।
हृदय को कमजोर बनाता है ‘क्रोध’
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया के शोधकर्ताओं के अनुसार क्रोध करने से रक्त नलिकाओं की भीतरी दीवार पर घातक कोलेस्ट्रॉल अधिक जमने लगता है। इस कारण से रक्त नलिकाएं छोटी हो जाती हैं तथा परिणाम स्वरूप हृदय को आवश्यकता से कम मात्रा में रक्त की आपूर्ति होती है। इसलिए क्रोध पर नियंत्राण करके लंबे एवं स्वस्थ जीवन को प्राप्त किया जा सकता है।
कैफीन की लत हानिकारक होती है
कैफीन केन्द्रीय तंत्रिका तंत्रा को उत्तेजित करके नींद में कमी लाना, उलझन, छटपटाहट एवं बेचैनी को उत्पन्न करती है जिससे कंपकंपी व दिल के दौरे, धड़कनें बढ़ने की अधिक संभावना रहती है, अतः चाय, कॉफी के माध्यम से कैफीन की मात्रा को शरीर के अन्दर जाने से रोकना चाहिए।
हृदय रोगी भी हो सकते हैं मोटी माताओं के बच्चे
सेंटर्स फार डिजीज कन्ट्रोल एण्ड प्रिवेन्शन, शिकागो के शोधकर्ताओं के अनुसार मोटी महिलाओं में सामान्य महिलाओं की तुलना में हृदय रोग वाले शिशुओं के जन्म लेने और प्रसव संबंधी कई गड़बडि़यां पायी जाती हैं। शोधकर्ताओं ने कहा है कि उनके अध्ययन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मोटी और अधिक वजन वाली महिलाओं के जनमने वाले बच्चों के हृदय में असामान्यताएं पायी जाती हैं और प्रसव में अन्य गड़बडि़यां भी होती हैं। शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि गर्भधारण करने से पूर्व महिलाओं को अपने मोटापे को नियंत्रित कर लेने से यह परेशानी नहीं आती।
चीनी कर रही है जिन्दगी को छोटा
गुड़ और खाण्ड कुछ समय पहले तक घर की रसोई में आम तौर पर मिल जाया करते थे किन्तु अब लोगों ने इनको छोड़कर ‘चीनी’ से नाता जोड़ लिया है। चीनी को बनाने की प्रक्रिया में उसके सभी लाभकारी एंजाइम, खनिज पदार्थ, विटामिंस तथा और भी उपस्थित फायदेमंद तत्व नष्ट हो जाते हैं। ऐसे स्थिति में चीनी खाद्य वस्तु नहीं रह जाती है। इस सफेद चीनी को खाते रहने से जोड़ों में जकड़न तथा धमनियों में रूकावट की स्थिति बननी शुरू हो जाती है तथा आंखों में मोतियाबिन्द भी हो सकता है। हृदय रोग, कैंसर तथा जोड़ों के दर्द का एक कारण भी चीनी का निरन्तर सेवन भी हो सकता है।
