गर्मियों के दिन थे। आसमान से सूरज आग उगल रहा था। गर्म हवा के थपेड़ों से बचने के लिए लोग अपने-अपने घरों में दुबके थे। धरती तवे की भांति जल रही थी। फूल, पौधे और वृक्ष सूरज की तेज किरणों से झुलस गए थे। पशु, पक्षी प्यास से व्याकुल मुंह खोले इधर-उधर भटक रहे थे। लगता था सब कुछ जलकर राख हो जाएगा।
तभी अचानक आसमान बादलों से घिरने लगा और कुछ ही देर में काले-काले बादलों से पूरा आसमान भर उठा। लोग कुछ सोच-समझ पाते, तड़-तड़-तड़ बादल बरसने लगे। लगभग आधे घंटे तक खूब बारिश हुई। लोग गर्मी से राहत महसूस करने लगे। मुरझाए पेड़-पौधे लहलहा उठे। चारों ओर हरियाली छा गई, मौसम खुशनुमा हो उठा।
आसमान में बादल के कुछ टुकड़े अब भी तैर रहे थे। गर्मी से बेहाल जीव-जंतु, पेड़-पौधे और मनुष्य को बारिश के पश्चात राहत महसूस करता देखकर बादल का एक बड़ा-सा टुकड़ा मंद-मंद मुस्कुरा रहा था।
‘तुमने कुछ कहा, बादल भैया?‘ बादलों के बीच अठखेलियां करती हुई हवा बोल पड़ी।
बादल ने कहा, ‘बहन, गर्म मौसम को मैंने पल भर में ही ठंडक में बदल दिया और समस्त जीव-जंतुओं को राहत पहुंचाई। सूरज की तरह मुझमें भी विशेषता है, मैं भी शक्तिशाली हूं।‘
हवा बोली, ‘बादल भैया, बात तो तुम्हारी सच है। गर्मी के दिनों में जल बरसाकर आप लोगों को कितनी राहत पहुंचाते हैं। आपके जल को पीकर समस्त जीव-जंतु जीवित हैं। कहा भी गया है कि जल ही जीवन है और आप जलदाता हैं। जहां आप नहीं बरसते, वहां सूखा-अकाल पड़ जाता है, अन्न नहीं उपजता। लोगों का जीना दूभर हो जाता है। यह बात तो बिलकुल सही है कि आपकी सूरज से अधिक उपयोगिता नहीं तो कम भी नहीं है। मेरे विचार से लोगों को सूरज के साथ-साथ आपकी भी पूजा करनी चाहिए।‘
हवा की बातें सूरज सुन रहा था। उसकी आंखों में घमंड की रेखाएं गहरी होती गईं। वह बोला, ‘मैं सबसे शक्तिशाली हूं। मेरे सामने बादल कुछ भी नहीं है। मैं आग बरसा सकता हूं। मैं चाहूं तो सब कुछ तहस-नहस कर सकता हूं।‘
हवा ने सूरज को समझाते हुए कहा, ‘सूरज भैया, मैं कहां कहती हूं कि तुम अनुपयोगी हो अथवा कम शक्तिशाली हो। सबका अपना विशिष्ट और महत्व होता है।‘
बादल ने कहा, ‘सूरज भैया, हवा बहन ठीक कह रही है। आप और मैं अपनी जगह पर विशिष्ट और अनोखे हैं। इसमें दो राय नहीं है। यह भी सच है कि मैं जल का स्रोत हूं। मेरे जल से ही संपूर्ण जीव जगत में जीवन का अस्तित्व है। तुम यह क्यों नहीं समझते कि जो तुम कर सकते हो, मैं नहीं कर सकता और जो मैं कर सकता हूं तुम नहीं कर सकते। हम दोनों ही एकदूसरे के पूरक हैं। सूरज, व्यर्थ का हठ मत करो।‘
‘नहीं, आज इस बात का फैसला होकर रहेगा कि मैं तुमसे ताकतवर हूं। सब शक्तिशाली मानकर मेरी ही पूजा करेंगे।‘ सूरज अपनी जिद पर अड़ते हुए आगबबूला होने लगा।
‘मान भी जाओ, सूरज, यूं जिद नहीं करते।‘ हवा और बादल ने सूरज को बहुत समझाया, किंतु सूरज ने एक न सुनी। उसने तो आज जैसे तय कर लिया था कि बादल को नीचा दिखाकर ही रहेगा।
बादल सूरज को समझा-बुझाकर हार गया। सूरज को न मानना था, न माना। अंततः बादल भी गुस्से में आ गया। उसने निश्चय कर लिया कि आज सूरज को अपनी विशेषता दिखा कर रहेगा। उसने बादल के टुकड़ों को आदेश दिया।
दोपहर का समय था। सूरज आसमान में चमक रहा था। तभी सहसा कहीं से काले घने बादल उमड़ते-घुमड़ते आकर सूरज से बगैर कुछ कहे-सुने उसे ढकना शुरू कर दिया। सूरज कुछ समझ पाता, इससे पहले बादल ने उसे पूरी तरह ढक लिया।
चारों ओर अंधेरा-सा छा गया। दिन में रात मालूम होने लगी। लोग हैरान रह गए, ‘अरे, यह क्या? दिन में ऐसा अंधकार।‘
स्कूल में बच्चों सहित अध्यापक सहम गए। लोग अनजाने अनिष्ट की आशंका से कांप गए।
बादल लोगों को चिंतित और व्याकुल देख फूला नहीं समाया, ‘अब होश ठिकाने आएंगे सूरज के।‘
इधर सूरज बादल के इस आक्रामक तेवर पर आश्चर्य प्रकट करता हुआ बोला, ‘बादल, यह कैसी नादानी है? तुमने असमय मुझे इस तरह क्यों ढक लिया?‘
‘सूरज भाई, तुम्हें अपनी ताकत का घमंड है न। अब दिखाओ अपनी ताकत।‘ बादल ने मुस्कुराते हुए कहा।
धरती पर अंधेरा छाए हुए लगभग आधा घंटा होने को आया था। लोग समझ नहीं पा रहे थे। सारा काम-काज अस्त-व्यस्त हो गया था। लोग मौसम में हुए एकाएक परिवर्तन से चिंतित हो उठे थे।
अब सूरज को अपनी गलती का अहसास हो गया। उसने बादल से माफी मांगते हुए कहा, ‘मुझे माफ कर दो, बादल भाई। मुझे आज समझ आ गया कि अपनी-अपनी जगह पर हर कोई महत्वपूर्ण होता है। मुझे अपनी ताकत पर घमंड नहीं करना चाहिए।‘
बादल खुश हो गया। थोड़ी देर बाद बादल के छंटते ही सब कुछ सामान्य हो गया।
