राज्यसभा का 267वां सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, 119 प्रतिशत कामकाज हुआ

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नयी दिल्ली, चार अप्रैल (भाषा) राज्यसभा की कार्यवाही शुक्रवार को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गयी तथा सत्र के दौरान उच्च सदन में 119 प्रतिशत कामकाज हुआ।

राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने उच्च सदन के 267वें सत्र को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने से पहले अपने पारंपरिक संबोधन में कहा कि इस दौरान सदन में वक्फ (संशोधन) विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुयी। उन्होंने बताया कि सत्र के दौरान 159 घंटे में 119 प्रतिशत कामकाज हुआ। इस सत्र में 49 निजी विधेयक पेश किए गए।

उन्होंने कहा कि इस सत्र के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव और बजट पर लंबी चर्चा हुयी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा तीन दिन तक चली और इसमें 73 सदस्यों ने हिस्सा लिया।

सभापति ने बताया कि बजट 2025-26 पर भी तीन दिन तक चर्चा हुई जिसमें 89 सदस्यों ने हिस्सा लिया।

उन्होंने बताया कि इसके साथ ही चार महत्वपूर्ण मंत्रालयों… गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, रेल मंत्रालय एवं शिक्षा मंत्रालय के कामकाज पर भी चर्चा हुयी।

धनखड़ ने कहा कि तीन अप्रैल को उच्च सदन की कार्यवाही पूर्वाह्न 11 बजे से शुरू होकर अगले दिन यानी चार अप्रैल को सुबह चार बज कर दो मिनट तक चली जो अब तक की सबसे लंबी बैठक थी। सभापति ने कहा ‘‘यह उच्च सदन के इतिहास में सबसे अधिक लंबे समय तक चली कार्यवाही है। इससे लोगों तक बहुत अच्छा संदेश गया।’’

उन्होंने कहा कि इस मैराथन बैठक के दौरान, सदन ने परिवर्तनकारी वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को मंजूरी दी जिसमें समानता और न्याय के सिद्धांतों को कायम रखते हुए वक्फ संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रावधान हैं।

सभापति ने कहा कि यह सत्र अपनी ऐतिहासिक विधायी उपलब्धियों और एकता की भावना के लिए याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह भारत की संसदीय यात्रा में एक निर्णायक क्षण रहा और इसने याद दिलाया कि संवाद और साझा मकसद के माध्यम से क्या हासिल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि उच्च सदन ने एक बार फिर दूसरों के लिए अनुकरणीय लोकतांत्रिक मानक स्थापित किए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘…इसी के साथ संसद के बजट सत्र का समापन हो रहा है और मैं आप सभी के प्रति आभार व्यक्त करता हूं कि आपने चर्चाओं और विचार-विमर्श में सक्रिय रूप से भाग लिया और बहुमूल्य योगदान दिया।’’

उन्होंने कहा कि इस सत्र के दौरान चर्चा में काफी जानकारी भरी बातें सुनने को मिलीं वहीं अलग-अलग राय भी सामने आईं। उन्होंने कहा कि एक लंबे अंतराल के बाद सदन में हास्य, व्यंग्य और हाजिरजवाबी के अलावा बौद्धिकता, संसदीय शिष्टाचार, अंतर-दलीय सहयोग और विधायी दृढ़ता भी देखी गई।

सभापति ने सहयोग के लिए उपसभापति हरिवंश, पीठासीन अध्यक्षों, सदन के नेता एवं विपक्ष के नेता, सदन में सभी दलों के नेताओं एवं उच्च सदन के महासचिव और कर्मचारियों की सराहना की तथा सभी के प्रति आभार जताया।

इस सत्र के दौरान सदन में वक्फ़ (संशोधन) विधेयक 2025, आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक 2024, बैंककारी विधियां (संशोधन) विधेयक 2024, आप्रवास एवं विदेशी विषयक विधेयक 2025, तेलक्षेत्र (विनियमन तथा विकास) संशोधन विधेयक 2024, वायुयान वस्तुओं में हित संरक्षण विधेयक 2025 तथा त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी विधेयक 2025 जैसे महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए।

तीन अप्रैल की बैठक में, देश भर में वक्फ़ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के मकसद से लाए गए वक्फ़ (संशोधन) विधेयक 2025 को देर रात मंजूरी दी गई। उसके बाद, मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की पुष्टि करने वाले सांविधिक संकल्प को पारित किया गया। हिंसाग्रस्त मणिपुर में 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। उच्चतम न्यायालय के एक निर्णय के अनुरूप दो महीने के अंदर राष्ट्रपति शासन की पुष्टि के लिए एक सांविधिक संकल्प सदन में चर्चा एवं पारित करने के लिए पेश किया गया और शुक्रवार तड़के करीब चार बजे इस संकल्प को ध्वनिमत से मंजूरी दी गई।

गौरतलब है कि उच्च सदन के 267वें सत्र की शुरुआत 31 जनवरी को दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति अभिभाषण के साथ हुई थी। इस सत्र का पहला चरण 13 फरवरी तक चला था। दूसरा चरण 10 मार्च से शुरू हुआ था और आज संपन्न हुआ।

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