बैंकाक, चार अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को बैंकाक के वात फो मंदिर गए, जो अपनी वास्तुकला और लेटे हुए बुद्ध की 46 मीटर लंबी विशाल प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है।
थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा भी उनके साथ थीं।
प्रधानमंत्री मोदी ने लेटे हुए भगवान बुद्ध की पूजा अर्चना की और मंदिर में वरिष्ठ बौद्ध भिक्षुओं को ‘संघदान’ दिया।
प्रधानमंत्री ने लेटे हुए बुद्ध के मंदिर को अशोक के सिंह स्तंभ की प्रतिकृति भी भेंट की तथा भारत और थाईलैंड के बीच मजबूत और जीवंत, सभ्यतागत संबंधों को याद किया।
विदेश मंत्रालय ने यात्रा की तस्वीरों के साथ ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में कहा, ‘‘सदियों पुराना एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध! प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा के साथ वात फ्रा चेतुफोन विमोनमंगकलाराम रत्चवोरमाहविहान- वात फो में लेटे हुए बुद्ध के ऐतिहासिक मंदिर का दौरा किया और दिव्य आशीर्वाद मांगा।’’
वात फ्रा चेतुफोन विमोनमंगकलाराम रत्चवोरमाहविहान को वात फो के नाम से जाना जाता है। यहां थाईलैंड में बुद्ध की छवियों का सबसे बड़ा संग्रह है और यह देश का सबसे पुराना सार्वजनिक शिक्षण केंद्र है।
वात फो का निर्माण 16वीं शताब्दी में एक मठ के रूप में किया गया था और 1788 में राजा राम-प्रथम द्वारा इसका जीर्णोद्धार किया गया। राजा राम प्रथम ने ही बैंकाक को थाईलैंड की राजधानी के रूप में स्थापित किया था।
मंदिर को मौजूदा स्वरूप राजा राम तृतीय के शासनकाल के दौरान दिया गया। उन्होंने 1832 में वात फो के अधिकांश भाग का विस्तार किया, विशेष रूप से दक्षिण विहार और पश्चिम विहार का, जहां लेटे हुए बुद्ध की प्रतिमा स्थापित है।
लेटे हुए बुद्ध की यह प्रतिमा 1848 में बनकर तैयार हुई थी और यह बैंकाक की सबसे बड़ी मूर्ति है।