नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) निर्यातक संगठनों के महासंघ फियो ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत पर लगाया गया 27 प्रतिशत अमेरिकी शुल्क निःसंदेह घरेलू निर्यातकों के लिए चुनौती है, लेकिन भारत की स्थिति अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में तुलनात्मक रूप से बेहतर है।
भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के अध्यक्ष एस. सी. रल्हन ने कहा कि शुल्क के बावजूद भारत में परिधान, रत्न एवं आभूषण, चमड़ा, इलेक्ट्रॉनिक, रसायन, प्लास्टिक तथा फर्नीचर सहित कुछ क्षेत्रों में निर्यात में बदलाव हो सकता है, जिससे कुछ प्रतिकूल प्रभावों की भरपाई हो सकती है।
रल्हन ने कहा, ‘‘ हालांकि ये शुल्क चुनौतियां पेश करते हैं, लेकिन भारत की स्थिति तुलनात्मक रूप से अनुकूल बनी हुई है। मिसाल के तौर पर वियतनाम में 46 प्रतिशत, चीन में 34 प्रतिशत और इंडोनेशिया में 32 प्रतिशत शुल्क है, जिससे भारत वियतनाम, चीन, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, श्रीलंका तथा म्यांमा जैसे प्रमुख प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है।’’
उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) का समय पर निष्कर्ष इन शुल्कों को कम करने और भारतीय निर्यातकों को राहत प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण है।
रल्हन ने कहा, ‘‘ इस तरह के समझौते से शुल्क चुनौतियों को हल करने के लिए एक संरचित ढांचा स्थापित हो सकता है, जिससे एकतरफा व्यापार उपायों या जवाबी शुल्कों के आसार कम हो जाएंगे।’’
भारत और अमेरिका इस समझौते पर बातचीत कर रहे हैं जिसका उद्देश्य इस वर्ष शरद ऋतु (सितंबर-अक्टूबर) तक पहले चरण को पूरा करना तथा 2030 तक वस्तुओं व सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान 191 अरब अमेरिकी डॉलर से दोगुना करके 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।
अमेरिका ने भारत पर 27 प्रतिशत का जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन का मानना है कि अमेरिकी वस्तुओं पर भारत उच्च आयात शुल्क वसूलता है, ऐसे में अब देश के व्यापार घाटे को कम करने और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाना जरूरी है।
भारत से आयातित उत्पादों पर पहले से ही अमेरिका में इस्पात, एल्युमिनियम और वाहन क्षेत्र पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया जा रहा है। शेष उत्पादों के लिए भारत पांच से आठ अप्रैल के बीच 10 प्रतिशत के ‘बेस लाइन’ शुल्क के अधीन है। फिर नौ अप्रैल से शुल्क देश-विशिष्ट 27 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा।
अमेरिका वित्त वर्ष 2021-22 से 2023-24 तक भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत के कुल माल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत, आयात में 6.22 प्रतिशत और द्विपक्षीय व्यापार में 10.73 प्रतिशत है।
वित्त वर्ष 2021-22 से 2023-24 तक अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। भारत के कुल माल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत, आयात में 6.22 प्रतिशत और द्विपक्षीय व्यापार में 10.73 प्रतिशत है।
अमेरिका के साथ भारत का 2023-24 में माल के मामले में व्यापार अधिशेष (आयात और निर्यात के बीच का अंतर) 35.32 अरब अमेरिकी डॉलर है। यह 2022-23 में 27.7 अरब अमेरिकी डॉलर, 2021-22 में 32.85 अरब अमेरिकी डॉलर, 2020-21 में 22.73 अरब अमेरिकी डॉलर और 2019-20 में 17.26 अरब अमेरिकी डॉलर था।