राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी चुनाव प्रणाली में सुधार से जुड़े कार्यकारी आदेश में भारत का उदाहरण दिया

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न्यूयॉर्क, 26 मार्च (भाषा) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी चुनाव प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन के लिए अपने कार्यकारी आदेश में भारत और ब्राजील का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों देश मतदाता पहचान को बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ रहे हैं, जबकि अमेरिका नागरिकता के लिए स्व-सत्यापन पर निर्भर है।

ट्रंप द्वारा मंगलवार को हस्ताक्षरित व्यापक कार्यकारी आदेश में कहा गया है कि स्वशासन की अग्रणी व्यवस्था के बावजूद, अमेरिका अभी तक दोनों देशों द्वारा उपयोग किए जाने वाले बुनियादी और आवश्यक चुनाव सुरक्षा को लागू करने में विफल रहा है।

आदेश के अनुसार, ‘‘उदाहरण के लिए भारत और ब्राजील मतदाता पहचान को बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ रहे हैं, जबकि अमेरिका नागरिकता के लिए बड़े पैमाने पर स्व-सत्यापन पर निर्भर है।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘मतों की गिनती करने में जर्मनी और कनाडा को स्थानीय अधिकारियों द्वारा सार्वजनिक रूप से गिने जाने वाले कागजी मतपत्रों के उपयोग की आवश्यकता होती है, जो मतदान विधियों से जुड़ी अमेरिकी ‘पैचवर्क’ (उलझन) की तुलना में विवादों की संख्या को काफी हद तक कम कर देता है।

आदेश में कहा गया है, ‘‘इसके अलावा, जबकि डेनमार्क और स्वीडन जैसे देश समझदारी से ‘डाक द्वारा मतपत्र भेजकर मतदान करने’ की सुविधा को उन लोगों तक सीमित रखते हैं जो व्यक्तिगत रूप से मतदान करने में असमर्थ हैं और मतपत्र भेजे जाने की तारीख की परवाह किए बिना देर से आने वाले वोटों की गिनती नहीं करते हैं, जबकि कई अमेरिकी चुनावों में अब भी डाक द्वारा सामूहिक मतदान की सुविधा है, जिसमें कई अधिकारी बगैर तिथि वाले मतपत्र या चुनाव के दिन के काफी बाद प्राप्त होने वाले मतपत्र को स्वीकार करते हैं।’’

आदेश में कहा गया है कि भारत में निर्वाचन आयोग मतदाता पहचान-पत्र को आधार से जोड़ने की संभावना तलाश रहा है, जिसमें बायोमेट्रिक डेटाबेस शामिल है। चुनाव आयोग ने 18 मार्च को कहा कि इस तरह के अभ्यास के लिए उसके विशेषज्ञों और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के बीच तकनीकी परामर्श ‘‘जल्द शुरू होगा।’’

निर्वाचन आयोग ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुसार, मतदान का अधिकार केवल भारत के नागरिक को ही दिया जा सकता है, लेकिन आधार किसी व्यक्ति की पहचान स्थापित करता है, न कि नागरिकता या मतदाता के रूप में नामांकित होने का अधिकार देता है।

राष्ट्रपति ने ‘धोखाधड़ी, त्रुटियों या संदेह से रहित स्वतंत्र, निष्पक्ष और शुचितापूर्ण चुनाव’ का आह्वान किया।

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