नयी दिल्ली, 28 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने हाल में नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मचने से संबंधित एक याचिका पर विचार करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया।
याचिका में दावा किया गया था कि भगदड़ में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई है और न्यायालय भीड़ नियंत्रण के मुद्दे पर अधिकारियों के लिए दिशा-निर्देश जारी करे।
न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति पी.के. मिश्रा की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से पूछा, “क्या 200 लोगों की मौत होने का कोई सबूत है?”
वकील ने दावा किया कि रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ के कई वीडियो सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपलोड किए गए थे और रेलवे ने वहां मौजूद गवाहों को नोटिस जारी किया है।
पीठ ने कहा, “वे व्यक्ति अदालत का रुख कर सकते हैं।”
पीठ ने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता का मानना है कि संबंधित प्राधिकारी इस मुद्दे की उपेक्षा कर रहे हैं?
वकील ने कहा कि यह याचिका राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम के उचित क्रियान्वयन और भीड़ नियंत्रण के लिए प्रासंगिक नियमों के लिए दायर की गई है।
पीठ ने याचिका खारिज कर दी और कहा कि याचिकाकर्ता अपनी शिकायत लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय जा सकता है।
वकील ने कहा कि याचिका में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार प्रतिवादी बनाया गया है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 19 फरवरी को रेलवे से यात्रियों की अधिकतम संख्या और प्लेटफार्म टिकटों की बिक्री निर्धारित करने के मुद्दे पर गौर करने को कहा था। ये मुद्दे नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हाल ही में हुई भगदड़ को लेकर दायर एक जनहित याचिका में उठाए गए थे।
उच्च न्यायालय ने संबंधित प्राधिकारियों से कहा था कि वे एक हलफनामे में इन मुद्दों पर लिए गए निर्णयों का ब्यौरा प्रस्तुत करें।
नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर 15 फरवरी को भगदड़ मचने से कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई थी। घटना उस समय हुई थी जब प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में जाने के लिए ट्रेनों में सवार होने को लेकर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ी थी।