महाशिवरात्रि: शिवालयों में उमड़ी भीड़, बाबा काशी विश्वनाथ के दरबार पहुंचे अखाड़े के संत

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लखनऊ, 26 फरवरी (भाषा) महाशिवरात्रि के अवसर पर पूरे उत्तर प्रदेश भर में शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। वाराणसी में भव्य शोभा यात्रा निकालने से लेकर छोटे शहरों में शांतिपूर्ण अनुष्ठानों तक लोग भगवान शिव से आशीर्वाद लेने के लिए एकत्र हुए।

महाशिवरात्रि के पर्व पर वाराणसी में नागा साधुओं और अखाड़ों के साधु- संतों ने शोभा यात्रा निकाल कर बाबा श्री काशी विश्वनाथ का दर्शन-पूजन किया।

इस शोभा यात्रा में अखाड़ों के महामंडलेश्वर शाही रथ पर विराजमान हुए थे। काशी के लोगों ने ‘हर हर महादेव’ के उद्घोष के साथ उनका स्वागत किया। शोभा यात्रा में नागा साधु हाथ में त्रिशूल, गदा और तलवार लिए बाबा विश्वनाथ के दरबार पहुंचे और जलाभिषेक किया। इस दौरान डमरू की ध्वनि और ‘हर हर महादेव’ के उद्घोष से पूरा इलाका भक्तिमय रहा।

शोभा यात्रा में शामिल निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर कैलाशानन्द गिरि महाराज ने कहा, ‘‘साधु-संत महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का दर्शन करके कुंभ को पूर्ण मानते है। हम सब साधु-संत अपने भगवान के चरणों में उपस्थिति दर्ज कराने जा रहे है। महादेव ने महाकुंभ को विशाल और भव्य बनाया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम सब साधु-संत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सफल महाकुंभ की बधाई देते हैं। इस बार कुंभ के स्वरूप को पूरी दुनिया ने देखा। सनातन को मानने वाले सभी लोगों ने कुंभ में डुबकी लगाई। 60 करोड़ से ज्यादा लोगों ने यहां स्नान किया। यही राम राज्य की परिकल्पना है। अराजक लोगों को कुंभ अच्छा नहीं लगा।’’

कैलाशानन्द ने कहा, ‘‘सबसे पहले मैं महाकुंभ का निमंत्रण देने महादेव के पास आया था। आज उस महाकुंभ की पूर्णाहुति होने जा रही है। हम सब आज महादेव के चरणों में दर्शन पूजन कर महाकुंभ का समापन करने जा रहे हैं। आज सात अखाड़े काशी में उपस्थित हैं।’’

कैलाशानन्द ने कहा कि सभी साधु-संत महादेव से नासिक और उज्जैन में होने वाले आगामी कुंभ के सकुशल सम्पन्न होने की कामना लेकर आये हैं। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रशासन के मुताबिक, महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ धाम रंग-बिरंगी रोशनी से चमक रहा है और विभिन्न प्रकार के सुगंधित पुष्पों से महक रहा है। महाशिवरात्रि के लिए मंदिर के दिव्य प्रांगण की भव्य आभा देखते ही बन रही है। श्री काशी विश्वनाथ धाम के द्वार से लेकर सभी मंडपों, विग्रहों के मंदिरों की फूलों से आकर्षक सजावट की गई है।

मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि गेट नंबर-चार से लेकर गंगा द्वार तक की गई मनभावन सजावट को देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए 25 फरवरी से 27 फरवरी तक श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सभी तरह के प्रोटोकॉल पर रोक लगायी गई है।

उन्होंने बताया कि श्री काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं जिससे श्रद्धालु कतारबध्य होकर सुगमता से श्री काशी विश्वनाथ महादेव का दर्शन कर सकें।

मिश्रा ने कहा कि इस बार काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा के भक्तों की संख्या का नया रिकार्ड बन सकता है। श्रद्धालु पूरी रात दर्शन कर सकेंगे। यह क्रम 27 फरवरी की सुबह तक चलेगा।

सम्भल में 46 साल बाद खुले प्राचीन कार्तिकेय महादेव मंदिर में इतने लम्बे अर्से बाद आज पहली महाशिवरात्रि पर्व पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। मंदिर में जलाभिषेक कर रहे लोगों में श्रद्धा, उत्साह और भावना का संगम देखने को मिल रहा है। इस प्राचीन कार्तिकेय महादेव मंदिर में सम्भल से ही नहीं, अन्य शहरों से भी श्रद्धालु कांवड़ में जल ले कर भगवान शिव को चढ़ाने और उनका जलाभिषेक करने आ रहे हैं।

श्रद्धालु अमन कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ”इस महाशिवरात्रि पर ब्रजघाट से कांवड़ लेकर आया हूं और इस प्राचीन कार्तिकेय महादेव मंदिर पर जीवन की पहली कांवड़ चढ़ाई है। मुझे बहुत खुशी की अनुभूति हो रही है।’’ श्रद्धालु संजय कुमार ने बताया कि उन्होंने 46 साल बाद खुले इस प्राचीन कार्तिकेय महादेव मंदिर में जल चढ़ाया है।

अलीगढ़ में हजारों की संख्या में कांवड़िए और श्रद्धालु सिद्धपीठ खेरेश्वर धाम महादेव मंदिर में जलाभिषेक के लिए एकत्र हुए। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हुए ‘ओम नमः शिवाय’ का जाप किया। प्रशासन ने भीड़ के लिए मंदिर तक सुगम पहुंच की व्यवस्था की है।

रायबरेली में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के मंदिरों में ‘हर हर महादेव’ के नारे लगाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। शिव मंदिरों में लंबी कतारें लग गईं। लोग भगवान शिव की पूजा करने के लिए अपनी बारी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

कानपुर में लाखों श्रद्धालुओं ने बाबा आनंदेश्वर मंदिर में दर्शन किये। इसे ‘कानपुर की छोटी काशी’ के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि इस मंदिर का महाभारत से ऐतिहासिक संबंध है और यह आस्था का प्रमुख केंद्र है। श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर गंगा जल और बेलपत्र चढ़ाए।

राजधानी लखनऊ में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। लोग पूजा-अर्चना के लिए शिव मंदिरों के बाहर कतारों में खड़े नजर आये।

गोरखपुर से प्राप्त खबर के अनुसार, महाशिवरात्रि पर मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने पूजा अर्चना की।

एक बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री सुबह से लेकर दोपहर बाद तक अलग-अलग मंदिरों में उपासना व भ्रमण में रत रहे। मुख्यमंत्री के आनुष्ठानिक कार्यक्रमों की शुरुआत गोरखनाथ मंदिर से हुई। मठ के प्रथम तल पर स्थित शक्ति मंदिर में उन्होंने भगवान भोले शंकर का रुद्राभिषेक किया।

मठ के पुरोहित एवं वेदपाठी ब्राह्मणों ने शुक्ल यजुर्वेद संहिता के रुद्राष्टाध्यायी के महामंत्रों द्वारा रुद्राभिषेक का अनुष्ठान पूर्ण कराया। रुद्राभिषेक के बाद मुख्यमंत्री ने हवन तथा आरती कर चराचर जगत के कल्याण हेतु महादेव से प्रार्थना की।

अनुष्ठान का यह कार्य दो घंटे से अधिक समय तक चला। इसके पूर्व मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित शिव मंदिर में भी पूजन किया। उन्होंने भगवान नंदी का पूजन कर भगवान शंकर का जलाभिषेक किया।

उल्लेखनीय है कि नाथपंथ की परंपरा में गुरु गोरखनाथ सबका कल्याण करने वाले भगवान शिव के अवतार माने जाते हैं। गोरखनाथ मंदिर के मूल में भी लोक कल्याण एवं लोक मंगल की ही भावना है। ऐसे में गोरक्षपीठाधीश्वर के लिए महाशिवरात्रि का पर्व बेहद महत्वपूर्ण होता है।

गोरखनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि का अनुष्ठान पूर्ण करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंधियारीबाग स्थित प्राचीन मानसरोवर शिव मंदिर, राजघाट स्थित मुक्तेश्वरनाथ मंदिर और झारखंडी स्थित झारखंडी महादेव मंदिर का भ्रमण किया। इन तीनों शिव मंदिरों में उन्होंने भगवान भोलेनाथ का दर्शन, पूजन व जलाभिषेक कर लोकमंगल की कामना की।

भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर जगह सुरक्षा, सफाई और श्रद्धालुओं की सुविधा का पूरा इंतजाम रखा जाए। उन्होंने इन तीनों शिवालयों पर आए श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार कर उनका कुशलक्षेम भी जाना।

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