विष्णु देव साय ने ‘नक्सल मुक्त’ घोषित छत्तीसगढ़ के लिए खाका पेश किया

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रायपुर/नयी दिल्ली, 12 अप्रैल (भाषा) छत्तीसगढ़ को “नक्सल-मुक्त” घोषित किए जाने के दो सप्ताह बाद राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आंतरिक सुरक्षा अभियानों से हटकर बड़े पैमाने पर ग्रामीण विकास और आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के पुनर्वास की ओर निर्णायक बदलाव का संकेत दिया है।

मुख्यमंत्री साय (62) की महत्वाकांक्षी योजनाओं में क्षेत्र में कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने के अलावा, कभी नक्सली हिंसा के गढ़ के रूप में पहचाने जाने वाले बस्तर को एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना भी शामिल है।

हाल ही में नयी दिल्ली में ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में मुख्यमंत्री ने दशकों पुराने नक्सलवाद के सफल उन्मूलन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली ‘‘डबल इंजन सरकार’’ और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित रणनीतिक समयसीमा को दिया।

साय जब 10 वर्ष थे तब उनके पिता का निधन हो गया था। साय ने अपने पिता के निधन के बाद परिवार के भरण-पोषण के लिए अपने प्रारंभिक वर्षों में बगिया गांव में खेतों में काम किया। वह अब इस बात से राहत महसूस करते हैं कि छत्तीसगढ़ आखिरकार नक्सलवाद से मुक्त हो गया है, जो राज्य की प्रगति में बाधा बन रहा था।

मुख्यमंत्री ने कहा, “एक समय ऐसा था जब इसको लेकर अनिश्चितता थी कि नक्सलवाद की समस्या का कभी समाधान हो पाएगा या नहीं। लेकिन आज, ‘डबल इंजन सरकार’ और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और दृढ़ संकल्प के साथ-साथ हमारे सुरक्षा बलों के साहस के बल पर, हम नक्सल मुक्त राज्य की ओर अग्रसर हुए हैं।”

साय को इस बात का खेद है कि इस क्षेत्र के लोग दशकों तक विकास से वंचित रहे। उन्होंने कहा, “लेकिन अब विकास उन तक पहुंच रहा है और उनका जीवन बेहतर होगा।”

नक्सल समस्या के फिर से उभरने की आशंकाओं पर मुख्यमंत्री राज्य के परिवर्तन को लेकर आत्मविश्वासी हैं, लेकिन साथ ही सतर्क भी हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा शिविरों की स्थायी मौजूदगी के साथ-साथ अस्पताल और विद्यालयों के आने से एक ‘‘विकास का ढांचा’’ तैयार हुआ है।

कम उम्र में ही परिवार की देखभाल करने के बाद, साय अब उसी कर्तव्यनिष्ठा को एक ऐसे राज्य में लागू करते हैं जो दशकों के संघर्ष से उभर रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कृषि जैसी बुनियादी जरूरतों पर ध्यान केंद्रित किया है।

वह बस्तर क्षेत्र के “संघर्षक्षेत्र” के तौर पर पहचान को बदलने का प्रयास कर रहे हैं और उनका कहना है कि राज्य सरकार ने एक व्यापक “बस्तर 2.0” योजना पेश की है, जो खनिज-समृद्ध इस क्षेत्र को पर्यटन, उच्च-तकनीकी बुनियादी ढांचे और कृषि विकास की ओर उन्मुख करेगी।

मुख्यमंत्री ने बस्तर क्षेत्र में हुए परिवर्तन को रेखांकित किया, जो भौगोलिक रूप से केरल से भी बड़ा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने 500 से अधिक ऐसे गांवों तक सफलतापूर्वक सरकारी योजनाएं पहुंचाई हैं जो पहले दुर्गम थे।

‘नियाद नेल्लानार’ पहल के तहत सरकार मोबाइल टावर लगा रही है, सड़कें बना रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि हर परिवार को बिजली और स्वच्छ पानी उपलब्ध हो।

बुनियादी ढांचे के अलावा, राज्य ने कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए इंद्रावती नदी पर देवगाव और मथना सिंचाई परियोजनाओं के लिए 2,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।

बस्तर क्षेत्र में खनन शुरू करने के बारे में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘फिलहाल, हमारा प्राथमिक ध्यान कृषि और पर्यटन पर है। विकास के आगे बढ़ने के साथ ही हम खनन गतिविधियों पर विचार करेंगे।’’

भाजपा नेता ने कहा कि वे कृषि को बढ़ावा देने, पर्यटन को प्रोत्साहित करने और वन उत्पादों पर आधारित मूल्यवर्धन पर ध्यान केंद्रित करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य होमस्टे और मत्स्य पालन को बढ़ावा देना है, ताकि कभी संघर्ष का पर्याय रहे इस क्षेत्र को सतत पर्यटन स्थल के रूप में पेश किया जा सके।

उन्होंने कहा कि बंदूकें शांत होने के साथ, राज्य अब पूर्व में दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों को मुख्यधारा में एकीकृत करने के लिए एक व्यापक ‘नियाद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गांव) नीति की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य के परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण घटक आत्मसमर्पण करने वाले लगभग 3,000 नक्सलियों का पुनर्वास है।

मुख्यमंत्री ने हिंसा की ओर दोबारा लौटने से रोकने के लिए एक सुनियोजित सहायता प्रणाली की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें वित्तीय सहायता, भूमि आवंटन और कौशल विकास शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को तीन वर्षों तक प्रति माह 10,000 रुपये मिलेंगे, साथ ही 50,000 रुपये की एकमुश्त सहायता राशि भी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गांवों में लौटने वालों को एक हेक्टेयर कृषि भूमि या शहरी जीवन चुनने वालों को आवासीय भूखंड उपलब्ध कराएगी।

उन्होंने कहा कि पूर्व नक्सलियों को स्थायी रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। साय ने कहा, “कई लोग मजबूरी और परिस्थितियों के कारण नक्सलवाद में शामिल हुए थे। विकास और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद लोग स्वयं उस जीवनशैली में वापस नहीं लौटना चाहते।”

अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए, राज्य की औद्योगिक नीति में अब उन उद्यमों के लिए विशेष प्रोत्साहन शामिल हैं जो कम से कम 1,000 निवासियों को रोजगार प्रदान करते हैं या 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश लाते हैं।

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