विमल कुमार ने 21 अंक वाले प्रारूप का समर्थन किया

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नयी दिल्ली, 11 अप्रैल (भाषा) भारत के पूर्व मुख्य कोच विमल कुमार ने बैडमिंटन विश्व महासंघ (बीडब्ल्यूएफ) से मौजूदा तीन गेम वाले 21 अंकों के प्रारूप को बरकरार रखने की अपील करते हुए कहा कि यह खेल को सही तरह से पेश कर रहा है।

खेल के वैश्विक शासी निकाय ने वर्तमान के तीन गेम वाले 21 अंकों के प्रारूप को तीन गेम वाले 15 अंक के प्रारूप में बदलने का प्रस्ताव दिया है। इस बदलाव पर मतदान 25 अप्रैल को डेनमार्क के होर्सेंस में बीडब्ल्यूएफ की वार्षिक आम बैठक में होगा।

आयुष शेट्टी की एशियाई बैडमिंटन चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में शीर्ष वरीयता प्राप्त और मौजूदा चैंपियन कुनलावट विटिडसर्न पर जीत के बाद विमल ने पीटीआई से स्कोरिंग प्रणाली और इस युवा भारतीय शटलर के बारे में बात की, जो इतिहास रचने के करीब पहुंच गया है।

विमल ने कहा, ‘‘वर्तमान प्रारूप बैडमिंटन को सही तरीके से पेश करता है और इसे बनाए रखने की जरूरत है। बीडब्ल्यूएफ अब व्यावसायिक कारणों से स्कोरिंग प्रारूप को बदलने की सोच रहा है। यह असली बैडमिंटन नहीं है।’’

उन्होंने कहा,‘‘मुझे उम्मीद है कि वे इस बात पर ध्यान देंगे और कम से कम बड़ी प्रतियोगिताओं में यह प्रारूप बनाए रखेंगे। बैडमिंटन एक मुश्किल खेल है और उन्हें इसको समझना होगा।’’

विमल ने इस संदर्भ में अन्य खेलों का उदाहरण भी दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘चाहे वो गोल्फ हो, मोटरस्पोर्ट्स हो या फुटबॉल, ये खेल तीन घंटे, पांच घंटे तक चलते हैं और इन्होंने कभी भी अपनी गुणवत्ता कम नहीं की है। हॉकी ने कभी भी अपनी गुणवत्ता कम नहीं की है। बास्केटबॉल ने भी अपनी गुणवत्ता कम नहीं की है।’’

विमल ने कहा, ‘‘बैडमिंटन एक ऐसा खेल है जिसे व्यापक रूप से देखा जाता है। चीन, इंडोनेशिया, भारत और अन्य जगहों पर इसके बहुत सारे प्रशंसक हैं। तो फिर ये कुछ लोग क्यों सोचते हैं कि इसे छोटा करने की जरूरत है।’’

अपने शिष्य आयुष के दिनेश खन्ना (1965) के बाद एशियाई बैडमिंटन चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय पुरुष एकल खिलाड़ी बनने पर विमल ने खुशी व्यक्त की।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी अकादमी में वह हमारे मुख्य कोच सागर चोपड़ा के मार्गदर्शन में काम करता है। हमने इरवानस्याह की मदद भी ली है। वह पिछले दो हफ्तों से आयुष की मदद कर रहा है। मुझे लगता है कि यह संयोजन आयुष के लिए वाकई अच्छा काम कर रहा है।’’

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