आत्मनिरीक्षण क्यों है जरूरी

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introspection

हममें से कितने लोग हैं जो अपने को इम्प्रूव करने के लिए आत्मनिरीक्षण का सहारा लेते हैं या इसकी जरूरत समझते हैं? अक्सर लोग इसी खुशफहमी में रहते हैं कि उनसे अच्छा कोई नहीं। वे जो सोचते हैं करते हैं, बस वही ठीक है। गलत सिर्फ दूसरे ही होते हैं।
दरअसल व्यक्ति अपने बारे में जो सोचता है और जो वास्तविकता होती है इनके मध्य की दूरी आत्मनिरीक्षण के द्वारा मिटाई जा सकती है।
आत्मनिरीक्षण के लिये पहले आपको विवेकपूर्ण समझदार होना आवश्यक है। मन की निर्मलता यहां बहुत मायने रखती है। कोई भी व्यक्ति संपूर्ण नहीं होता। हर किसी में अगर गुण हैं तो अवगुण भी होते हैं। जो अपने अवगुणों को समझ ले, बस फिर उसका उद्धार दूर नहीं। पहले बीमारी डायग्नॉज होनी चाहिए, तभी उपचार संभव है।
ईश्वर ने मानव के मन की धुरी अहम् पर ही बनाई है लेकिन यही अहम् जब फूलकर गुब्बारा बन जाता है तो वह चरित्रा की दुर्बलता का प्रतीक बन जाता है। अहंकारी व्यक्ति अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझता। इस तरह वह अपनी प्रगति पर पूर्णविराम लगा लेता है।
व्यक्ति के लिए सबसे आसान कार्य है ब्लेम गेम खेलना और अपनी कमियों व गलतियों को नजरअंदाज कर के अपनी असफलताओं के लिए औरों को दोषी ठहराना। आज के युग में माता पिता इस गेम के ईज़ी टारगेट बनते हैं। गरीब हों तो पैसे के लिए, अमीर हों तो वक्त न देने के लिए वे दोषी हैं। बच्चे यह नहीं देखते कि इसका मुआवजा भी उन्हें मिला है। एक पूरे सिस्टम के लिए केवल मां बाप को दोषी ठहराना कहां तक उचित है।
बुरा व्यक्ति कभी भी संतुष्ट नहीं रहता और सुख जो हर व्यक्ति की मंजिल है, उससे दूर रहता है। अपनी कुंठाओं व प्रपंचों में घिरे वे सदा तनावग्रस्त रहते हैं। वे मानसिक रोगी बन जाते हैं। डॉक्टरों के पास भागते फिरते हैं जबकि ऐसे रोगों के डॉक्टर वे स्वयं बन सकते हैं। आत्मनिरीक्षण व आत्ममंथन करके वे अपने को पहचानने लायक बन सकते हैं।
आत्मनिरीक्षण सिर्फ भीतर से कमजोर लोग ही करें, ऐसा नहीं है। यह हर व्यक्ति के लिए है। भीतर से मजबूत होने पर भी उसे बनाये रखने के लिए भीतर झांकते रहना चाहिए। समय-समय पर दिमागी जाले साफ करने में आत्मनिरीक्षण सहायक है। अपने सद्गुणों को भी भीतर झांककर ही आंका जा सकता है। इससे जहां अपने पर विश्वास जमता है, वहीं चरित्रा में मजबूती का अहसास संतुष्टि देता है। आगे भी अपनी क्षमताओं को व्यवहार में लाने के लिए राह रोशन होती है। इसके अभाव में संशय व्यक्ति को कंन्फ्यूज़ किए रहता है।
अपने बारे में अच्छी या बुरी गलत धारणाएं पालने वालों को भी सेल्फ इंट्रॉस्पेक्शन से फायदा होता है। वे वास्तविकता के धरातल पर आ जाते हैं। इस तरह वे सही जजमेंट की ओर बढ़ते हुए अपनी गलतियां महसूस कर उन्हें दूर कर सकते हैं, इसलिए योगा, मेडिटेशन की तरह आत्मनिरीक्षण के लिए भी कुछ वक्त रोज निकालें, किसी भी समय अपनी सुविधानुसार।

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