नाटो पर ट्रंप का फिर हमला, कहा : जरूरत के वक्त साथ नहीं दिया

0
trump-nato

वॉशिंगटन, नौ अप्रैल (एपी) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो महासचिव मार्क रुटे के साथ बंद कमरे में हुई बैठक के बाद सैन्य गठबंधन की पुन: आलोचना करते हुए दोहराया कि जरूरत के समय नाटो अमेरिका के साथ नहीं था।

बैठक से पहले ट्रंप ने संकेत दिया था कि ईरान युद्ध के दौरान सहयोग नहीं मिलने पर अमेरिका नाटो से अलग होने पर विचार कर सकता है। बैठक के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर बड़े (कैपिटल) अक्षरों में लिखा, “नाटो हमारे साथ नहीं था जब हमें उसकी जरूरत थी और आगे जरूरत पड़ने पर भी नहीं होगा।”

व्हाइट हाउस ने इस पर तत्काल कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ट्रंप नाटो से अलग होने के मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं।

ट्रंप और रुटे के बीच यह बैठक ऐसे समय हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनी है, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का रास्ता साफ हुआ है।

अमेरिकी कांग्रेस 2023 में एक कानून पारित कर चुकी है, जिसके तहत कोई भी राष्ट्रपति कांग्रेस की मंजूरी के बिना नाटो से बाहर नहीं हो सकता।

ट्रंप लंबे समय से नाटो की आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में भी संकेत दिया था कि वह गठबंधन से बाहर निकल सकते हैं।

नाटो की स्थापना 1949 में यूरोप की सुरक्षा के लिए की गई थी और इसके 32 सदस्य देशों के बीच सामूहिक रक्षा समझौता लागू है।

ट्रंप ने ईरान युद्ध के दौरान यह भी आरोप लगाया कि नाटो देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में अमेरिका का साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा था कि इस महत्वपूर्ण मार्ग की सुरक्षा उन देशों की जिम्मेदारी है, जो इसके जरिए तेल पर निर्भर हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, नाटो के कुछ सदस्य देशों जैसे स्पेन और फ्रांस ने ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका को अपने हवाई क्षेत्र या सैन्य ठिकानों के उपयोग पर सीमाएं लगाईं, जिससे ट्रंप नाराज बताए जा रहे हैं।

ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर भी नाराजगी जताई, जो नाटो सदस्य डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है। उन्होंने इस साल की शुरुआत में ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की बात कही थी, लेकिन बाद में पीछे हट गए।

इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रुटे से अलग बैठक में ईरान युद्ध, रूस-यूक्रेन संघर्ष और नाटो सहयोग बढ़ाने के मुद्दों पर चर्चा की।

सीनेट के वरिष्ठ नेता मिच मैककॉनेल ने नाटो के समर्थन में बयान जारी करते हुए कहा कि 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद नाटो सहयोगियों ने अमेरिका के साथ मिलकर अफगानिस्तान और इराक में लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने ट्रंप से सहयोगियों के साथ संबंधों को लेकर स्पष्ट और संतुलित रुख अपनाने की अपील की।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान युद्ध, यूक्रेन को लेकर नीति और ग्रीनलैंड विवाद जैसे मुद्दों के चलते ट्रंप और नाटो के बीच तनाव और बढ़ गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *