खांसी होने पर शलजम को पानी में उबालकर पिएं। गले के रोगों को ठीक करने हेतु शलजम को गाजर के साथ चबाएं। इससे आवाज भी साफ होती है। शलजम के पत्ते का रस फोड़े-फुंसियों पर लगाने से लाभ होता है। पैरों की एडि़यां फटने पर उन पर शलजम को रगड़ें। पुराने जुकाम में शलजम के सूखे पत्ते जलाकर संूघें। नियमित प्रयोग से अवश्य लाभ होगा। हिचकी आने पर कच्चे शलजम को मिश्री के साथ चबाएं। मस्से होने पर उन पर शलजम व प्याज का रस मलें। बच्चों के पेट में कीड़े होने पर उन्हें सुबह-शाम एक-एक चम्मच की मात्रा में शलजम का रस पिलाएं। मधुमेह रोग में सरसों के तेल में शलजम की सब्जी बनाकर खाएं। शलजम की सब्जी की 40 ग्राम मात्रा प्रतिदिन सेवन करने से हृदय रोग में लाभ होता हैं।