सीतारमण का स्टालिन पर पलटवार, ‘झूठा विमर्श’ गढ़ने का लगाया आरोप

0
sdeeeee

नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन पर गेहूं और धान किसानों को दिए जाने वाले बोनस संबंधी केंद्र सरकार के परामर्श पर ‘झूठा विमर्श’ गढ़ने का आरोप लगाते हुए पलटवार किया।

उन्होंने कहा कि द्रमुक पार्टी इसके जरिये खुद को किसानों और तमिलनाडु के लोगों के रक्षक के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है।

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर सीतारमण ने स्टालिन पर व्यय सचिव वी. वुअलनाम के नौ जनवरी को सभी राज्य सरकारों को लिखे गए पत्र की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाया और कहा कि जहां अधिकांश राज्य सरकारों ने, चाहे वे किसी भी दल की हों, पत्र के उद्देश्य को समझा और सहकारी संघवाद की भावना से प्रतिक्रिया दी, वहीं केवल मुख्यमंत्री स्टालिन ने इसे ‘सनसनीखेज’ बनाने का विकल्प चुना।

वित्त मंत्रालय के पत्र में गेहूं और धान के भारी अधिशेष भंडार को देखते हुए, राज्य सरकारों को मौजूदा बोनस नीति की समीक्षा करने और इन दोनों पर बोनस बंद करने पर विचार करने की सलाह दी गई थी। साथ ही, पोषण सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सतत कृषि के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप दाल, तिलहन और श्री अन्न (ज्वार, बाजारा जैसे मोटे अनाज) को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन पर ध्यान देने की बात कही गई थी।

हालांकि, यह पत्र राज्यों के लिए एक परामर्श मात्र था, स्टालिन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर आरोप लगाया कि केंद्र ने ‘स्पष्ट रूप से’ राज्य सरकारों की मौजूदा बोनस नीति की समीक्षा करने और धान पर बोनस बंद करने पर विचार करने के लिए कहा है। उन्होंने सीतारमण को नौ जनवरी के पत्र को सार्वजनिक करने की चुनौती दी।

चुनौती स्वीकार करते हुए, सीतारमण ने ‘एक्स’ पर पत्र डालते हुए कहा कि राज्यों को भेजा गया यह संदेश राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी साझा करने का ‘निमंत्रण’ है। ऐसी चुनौती केवल स्टालिन के ‘झूठे दिखावे’ को बताती है।

उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय हित के प्रति थोड़ी सी भी प्रतिबद्धता रखने वाला कोई भी मुख्यमंत्री इसका स्वागत करेगा। इसके बजाय, मुख्यमंत्री थिरु स्टालिन ने एक रचनात्मक सुझाव को मनगढ़ंत शिकायत में बदल दिया क्योंकि द्रमुक के लिए भारत की रणनीतिक आवश्यकताएं चिंता का विषय नहीं हैं, बल्कि राजनीतिक लाभ उठाने का अवसर हैं।’’

सीतारमण ने स्टालिन को केंद्र-विरोधी बयानबाजी में समय बर्बाद न करने की सलाह देते हुए उनसे तमिलनाडु के लोगों को यह समझाने को कहा कि वे दाल और तिलहन में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय विदेशी हितों को अवसर क्यों दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जब आवश्यक खाद्य पदार्थ आयात पर निर्भर होते हैं, तो घरेलू खाद्य सुरक्षा बाहरी झटकों और मूल्य में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हो जाती है। भारत जैसे बड़े देश के लिए यह स्थिति ठीक नहीं है। दाल और तिलहन का घरेलू उत्पादन बढ़ाना न केवल आर्थिक आवश्यकता है, बल्कि रणनीतिक जरूरत भी है।

सीतारमण ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री स्टालिन वही करते दिख रहे हैं जिसमें वे और उनकी पार्टी माहिर हैं – केंद्र और राज्यों के बीच फूट डालना, झूठे विमर्श गढ़ना और खुद को किसानों और अन्य तमिल लोगों के रक्षक के रूप में पेश करना।’’

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *