रेपो दर स्थिर रहने से रियल एस्टेट क्षेत्र को मिलेगा समर्थन: विशेषज्ञ
Focus News 8 April 2026 0
नयी दिल्ली, रियल एस्टेट कंपनियों तथा विशेषज्ञों ने बुधवार को कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने का निर्णय एक संतुलित और सकारात्मक कदम है। इससे खास तौर से मध्यम-आय एवं किफायती आवास वाले खंड में मांग को बढ़ावा मिलेगा।
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर को 5.25 प्रतिशत बरकरार रखा है।
रियल एस्टेट क्षेत्र के शीर्ष निकाय नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने कहा, ‘‘ वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच केंद्रीय बैंक के संतुलित और सकारात्मक कदम से बाजार को स्थिरता मिलेगी। यह कदम देश में आर्थिक स्थिरता को सुनिश्चित करेगा और सभी क्षेत्र में विकास की गति में योगदान देगा ।’’
जैन ने कहा, ‘‘नीतिगत स्थिरता रियल एस्टेट क्षेत्र में अहम योगदान देगी क्योंकि इससे डेवलपर और घर खरीदने वालों, दोनों का भरोसा बढ़ता है। इससे डेवलपर जहां नई परियोजनाएं लाने के लिए प्रोत्साहित होते हैं। वहीं आवास की मांग को भी बढ़ावा मिलता है खासकर मध्यम-आय एवं किफायती आवास वाले खंड में क्योंकि ब्याज दरों में बदलाव से ये खंड जायदा प्रभावित होते हैं।’’
रियल एस्टेट से जुड़ी सेवाएं देने वाली सीबीआरई के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया व अफ्रीका) अंशुमान मैगजीन ने कहा, ‘‘आरबीआई का रेपो दर को स्थिर रखने का निर्णय बदलती हुई व्यापक आर्थिक परिस्थितियों के बीच एक संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है। फरवरी 2025 से अब तक एक प्रतिशत से अधिक की कटौती के साथ, अब ध्यान बेहतर ऋण प्रवाह और व्यापक आर्थिक गति पर केंद्रित है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह विशेष रूप से रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए, यह स्थिरता का संकेत देता है और डेवलपर तथा घर खरीदारों को दीर्घकालिक भरोसा प्रदान करता है। आगामी त्योहारों और सीमित दायरे में मुद्रास्फीति से बाजार की गति को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।’’
कोलियर्स इंडिया में राष्ट्रीय निदेशक एवं अनुसंधान प्रमुख विमल नादर ने कहा, ‘‘ आरबीआई का रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर और तटस्थ रुख को बरकरार रखना पश्चिम एशिया में जारी संकट, जिंस और ईंधन कीमतों पर उसके प्रभाव तथा आपूर्ति शृंखला में व्यवधान के बीच ‘देखो और इंतजार करो’ की नीति को दर्शाता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘फिलहाल रियल एस्टेट के लिए समग्र दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है, लेकिन आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं और परिणामस्वरूप निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों से मौजूदा और भविष्य की निर्माण गतिविधियों में नरमी आ सकती है….। हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था के आधारभूत तत्व मजबूत बने हुए हैं और ये मध्यम अवधि में रियल एस्टेट क्षेत्र को मजबूती प्रदान करेंगे।
प्रतीक ग्रुप के महानिदेशक प्रतीक तिवारी ने कहा, ‘‘यह सही एवं संतुलित फैसला है। खासकर जब दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है। इससे घर खरीदने वालों का भरोसा बढ़ेगा। पहली बार घर खरीदने वाले और अपने रहने के लिए घर लेने वाले लोगों के लिए आरबीआई का यह कदम बहुत अहम है…।’’
एसकेए ग्रुप के निदेशक संजय शर्मा ने कहा कि आरबीआई अभी खासकर वैश्विक अनिश्चितता के बीच ‘देखो और इंतजार करो’ की नीति अपना रहा है। रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए इसका मतलब है कि कर्ज की लागत स्थिति स्थिर रहेगी और इससे क्षेत्र में एक भरोसा बढ़ेगा।
साया ग्रुप के प्रबंध निदेशक विकास भसीन ने कहा, ‘‘आरबीआई का यथास्थिति बनाए रखने का फैसला काफी हद तक उम्मीद के मुताबिक है। लगातार वैश्विक तनाव के बीच यह कदम रियल एस्टेट क्षेत्र एवं कर्ज लेने वालों दोनों के लिए सकारात्मक है, क्योंकि यह स्थिरता के साथ-साथ लगातार बनी हुई मांग को समर्थन करता है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह फैसला भारतीय अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित मजबूती को भी दर्शाता है। हमें पूरा भरोसा है कि भारत वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी अपनी मजबूती जारी रखेगा और अधिक ताकतवर बनकर उभरेगा।’’
त्रेहान ग्रुप के माहनिदेशक सारांश त्रेहान ने कहा, ‘‘आरबीआई का फैसला रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक कदम है। इससे बाजार में स्थिरता बनी रहती है और घर खरीदने वालों का भरोसा बढ़ता है। स्थिर ब्याज दरें खरीदारों को सही समय पर निर्णय लेने में मदद करती हैं।’’
अमरावती ग्रुप के संस्थापक एवं चेयरमैन रजनी कांत मिश्रा ने कहा, ‘‘ रेपो दर को अपरिवर्तित रखने का आरबीआई का फैसला रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह उधार लेने की लागत में स्थिरता सुनिश्चित करने के साथ खरीदारों का भरोसा बनाए रखता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘एक ऐसे बढ़ते बाजार के लिए, जहां बुनियादी ढांचा और नियोजित विकास को गति मिल रही है, स्थिर ब्याज दर मांग बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। घर खरीदने वालों को अनुमानित ईएमआई से लाभ होता है, जबकि डेवलपर समय पर डिलीवरी और विस्तार योजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।’’
