नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने पत्रकार राणा अय्यूब की ‘एक्स’ पर की गई कुछ पोस्ट को बुधवार को “बेहद आपत्तिजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक” बताया तथा इन्हें हटाने संबंधी याचिका पर उनसे जवाब तलब किया।
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव एक वकील की उस याचिका की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें आरोप लगाया गया है कि अय्यूब की पोस्ट से हिंदू देवी-देवताओं और “सम्मानित ऐतिहासिक हस्तियों” का अपमान हुआ है।
न्यायाधीश ने कहा कि इन पोस्ट के संबंध में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का भी निर्देश दिया गया है। अदालत ने केंद्र, दिल्ली पुलिस और ‘एक्स’ को मिलकर काम करने और 24 घंटे में आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा, ‘‘इस मामले को परसों सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। प्रतिवादी संख्या-चार (अय्यूब) की अत्यंत आपत्तिजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक पोस्ट को देखते हुए कार्रवाई आवश्यक है। संबंधित पोस्ट के आधार पर सक्षम न्यायालय द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश भी दिया गया है।’’
अदालत ने यह भी कहा, “मामला विचार करने योग्य है।”
अदालत ने संबंधित याचिका पर केंद्र सरकार, राणा अय्यूब और सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ को नोटिस जारी किया है। याचिका में अय्यूब के “बेहद आपत्तिजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक ट्वीट” को तुरंत हटाने का अनुरोध किया गया है।
अदालत ने दिल्ली पुलिस को भी इस मामले में पक्षकार बनाया है।
याचिकाकर्ता अमिता सचदेवा ने कहा कि वह सनातन धर्म को मानती हैं और उनकी शिकायत पर एक मजिस्ट्रेट अदालत ने पहले ही प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। अदालत ने माना है कि पत्रकार की पोस्ट में भारतीय दंड संहिता के तहत संज्ञेय अपराध के प्रारंभिक तत्व मौजूद हैं।
याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता ने ‘एक्स’ के क्षेत्रीय शिकायत अधिकारी और शिकायत समिति से भी इस आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने की मांग की, लेकिन समिति ने यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया कि मामला अदालत में विचाराधीन है।
याचिकाकर्ता ने बताया कि पोस्ट के सार्वजनिक होने से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और संविधान में निहित उनके मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है।
जनवरी 2025 में एक मजिस्ट्रेट अदालत ने दिल्ली पुलिस को अय्यूब के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था।
आरोप है कि 2016-17 में अय्यूब की पोस्ट में हिंदू देवी-देवताओं के अपमान, भारत-विरोधी भावना भड़काने और धार्मिक असहमति पैदा करने के तत्व शामिल थे।