उत्तर प्रदेश सरकार के कार्यक्रमों में नहीं बुलाए जा रहे विपक्षी सांसद : जावेद अली खान

0
sd32ee2

नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) समाजवादी पार्टी के सांसद जावेद अली खान ने बुधवार को राज्यसभा में आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के आधिकारिक कार्यक्रमों और योजनाओं की शुरुआत से जुड़े आयोजनों में विपक्षी सांसदों तथा विधायकों को आमंत्रित नहीं किया जा रहा है।

शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए जावेद अली खान ने कहा कि केंद्र के दिशा-निर्देशों के तहत संबंधित क्षेत्र के निर्वाचित प्रतिनिधियों को ऐसे आयोजनों में आमंत्रित किया जाना अनिवार्य है, इसके बावजूद विपक्षी सांसदों, विधायकों, खास तौर पर समाजवादी पार्टी के सदस्यों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि भाजपा पदाधिकारी इनमें शामिल हो रहे हैं।

उन्होंने कई उदाहरण देते हुए कहा कि संभल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के उद्घाटन के दौरान वहां के चार निर्वाचित प्रतिनिधियों में से समाजवादी पार्टी के तीन प्रतिनिधियों को आमंत्रित नहीं किया गया।

खान ने कहा कि मुरादाबाद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक ऐसे हवाईअड्डे का उद्घाटन किया जो अभी तक चालू नहीं हुआ है, लेकिन वहां मंडल के छह में से पांच समाजवादी पार्टी सांसदों को आमंत्रित नहीं किया गया।

जावेद अली खान ने कहा कि कासगंज जिले में भी समाजवादी पार्टी के सांसदों और विधायकों को कार्यक्रमों से बाहर रखा गया और प्रयागराज में 5,500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के उद्घाटन के दौरान भी किसी विपक्षी सांसद को आमंत्रित नहीं किया गया।

उन्होंने अपने निजी अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार उनके जिले में एक सरकारी कार्यक्रम में शामिल हुए थे, लेकिन उन्हें और उनकी पार्टी के विधायक को आमंत्रित नहीं किया गया।

खान ने कहा, “मैंने उन्हें फोन कर बताया कि मुझे और हमारी पार्टी के विधायक को आमंत्रित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि वह इस पर ध्यान देंगे, लेकिन इसके बावजूद मुझे आमंत्रित नहीं किया गया।”

जावेद अली खान ने सवाल उठाया कि क्या विपक्षी सांसदों को बाहर रखने का फैसला प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की जानकारी में लिया जा रहा है या फिर “चापलूस नौकरशाह” अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए ऐसा कर रहे हैं।

उन्होंने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि यदि सरकार ऐसी व्यवस्था को नीति बनाना चाहती है तो कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के दिशा-निर्देशों में औपचारिक संशोधन करना चाहिए।

उन्होंने कहा, “विपक्ष में होना कोई अपराध नहीं है। सांसदों और विधायकों की गरिमा की रक्षा की जानी चाहिए।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *