अभी तक विशेषज्ञों का मानना था कि अगर शिशु का जन्म के समय वजन अधिक हो तो उसके वयस्क होने पर उसके मोटे होने की संभावना बढ़ जाती है पर हाल ही में हुए एक शोध से पता चला है कि माता का वजन और बच्चे की प्रथम सात सालों में हुई बढ़ोत्तरी निर्धारित करती है कि उसके वयस्क होने पर मोटापे की संभावना है कि नहीं। इस शोध में पाया गया है कि प्रथम सात सालों तक जिन शिशुओं में विकास जल्दी होता है उनके मोटा होने की संभावना अधिक होती है। इस शोध में यह भी पाया गया कि जो बच्चे प्रथम सात वर्ष में वयस्कावस्था की ऊंचाई पा लेते हैं। उन्हें उस ऊंचाई तक न पहुंच पाने वाले बच्चों की तुलना में 33 वर्ष के होने पर मोटापे की संभावना अधिक हो जाती है। साथ ही इस शोध में यह भी पाया गया कि बच्चे का जन्म के समय होने वाले वजन का वयस्क होकर मोटा होने की संभावना से बहुत ही कम संबध होता है। अगर मां का वजन अधिक है तो उसके बच्चे आकार में बड़े होते हैं जो बड़े होकर मोटे वयस्क बनते है पर पिता के वजन का बच्चे के वयस्क होने पर मोटा होने से कोई संबंध नहीं होता।