नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य के रूप में शुक्रवार को शपथ लेने पर उन्हें बधाई देते हुए कहा कि वह देश के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं तथा सुशासन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की हर जगह सराहना हुई है।
मोदी ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि कुमार का लंबा राजनीतिक अनुभव संसद की गरिमा को और बढ़ाएगा।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘नीतीश कुमार जी देश के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं। सुशासन को लेकर उनकी प्रतिबद्धता की हर तरफ सराहना हुई है।’’
उन्होंने कहा कि कुमार ने बिहार के विकास में अमिट योगदान दिया है और उन्हें एक बार फिर संसद में देखना बहुत सुखद होगा।
मोदी ने कहा कि सांसद और केंद्रीय मंत्री के रूप में भी उन्होंने कई वर्षों तक अपनी सेवाएं दी हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि उनके लंबे राजनीतिक अनुभव से संसद की गरिमा और बढ़ेगी। राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने पर उन्हें हार्दिक बधाई और आगे के कार्यकाल के लिए ढेरों शुभकामनाएं।’’
नीतीश कुमार ने शुक्रवार को राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली। राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने अपने कक्ष में एक संक्षिप्त समारोह में उन्हें उच्च सदन की सदस्यता की शपथ दिलाई। कुमार ने केंद्रीय मंत्री एवं सदन के नेता जे पी नड्डा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल समेत कई नेताओं की मौजूदगी में हिंदी में शपथ ली।
प्रधानमंत्री ने राज्यसभा के निवर्तमान उपसभापति हरिवंश को भी उच्च सदन का सदस्य मनोनीत किए जाने पर बधाई दी।
मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘हरिवंश ने पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन में अमूल्य योगदान दिया है। वह एक सम्मानित बुद्धिजीवी और विचारक हैं। उन्होंने अपने गहन विचारों और अंतर्दृष्टि से पिछले कुछ वर्षों में सदन की कार्यवाही को समृद्ध किया है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मुझे प्रसन्नता है कि माननीय राष्ट्रपति ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है। आगामी संसदीय कार्यकाल के लिए उन्हें मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं।’’
राज्यसभा के निवर्तमान उपसभापति हरिवंश ने शुक्रवार को उच्च सदन के सदस्य के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की सेवानिवृत्ति से रिक्त हुई सीट के लिए उन्हें मनोनीत किया था। हरिवंश का उच्च सदन के सदस्य के रूप में दूसरा कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त हुआ था।