आमतौर पर रस्सी कूदना लड़कियों का खेल समझा जाता है लेकिन आज यह व्यायाम के रूप में काफी लोकप्रिय हो रहा है। पश्चिमी देशों में रस्सी कूदना एक आम व्यायाम है। रस्सी कूदना एक ऐसा व्यायाम है जिससे शरीर के सभी अंगों की अच्छी कसरत हो जाती है। अगर आपके पास व्यायाम के लिए ज्यादा समय नहीं है तो सिर्फ पंद्रह मिनट रस्सी कूदने से ही आपके पूरे शरीर की अच्छी कसरत हो जाती है। नियम से रस्सी कूदने से मोटापा तो कम होगा ही, साथ ही फिगर भी अच्छी निखर कर आएगी। रस्सी कूदने से पैर, टखनों तथा कलाइयों की अच्छी कसरत हो जाती है। वे मजबूत होते हैं व शारीरिक बल बढ़ता है। छोटे बच्चों के लिए रस्सी कूदना बहुत ही लाभदायक है। इससे शरीर मजबूत होने के साथ-साथ लम्बाई बढ़ती है, भूख भी खुल कर लगती है। रस्सी कूदने से रक्त संचार तीव्र होता है लेकिन अगर आपको हृदय, लिवर या किडनी संबंधी या अन्य कोई बीमारी है तो बिना डॉक्टर की सलाह लिए रस्सी न कूदें। रस्सी कूदने के लिए सबसे अच्छी जगह हरी घास का समतल मैदान है। कठोर और ऊबड़-खाबड़ जगह पर रस्सी कूदने से पैरों और घुटनों को चोट पहुंच सकती है। घुटनों के जोड़ों को नुकसान से बचाने के लिए अच्छे किस्म के स्पोर्ट शूज पहनें। चप्पल पहन कर या नंगे पैर रस्सी कूदने से बचें। रस्सी कूदने से पहले हल्के व्यायाम या जॉगिग से शरीर को गर्म कर लेना चाहिए। रस्सी कूदते समय अपने शरीर को सीधा रखें। आप कितनी देर रस्सी कूदें, इसका कोई निश्चित नियम नहीं है। आप जितनी देर चाहें, रस्सी कूद सकती हैं पर इतनी देर भी नहीं कि आपके पैर जख्मी हो जाएं। हर चीज की अति नुकसानदेह होती है। रस्सी कूदने की अवधि धीरे-धीरे बढ़ाएं। यह नहीं कि आप पहले ही दिन इतनी रस्सी कूद लें कि वह हानिकारक साबित हो। पहले सप्ताह आप बिना रस्सी के पचास से सौ बार कूदें। पूरे सप्ताह यही तरीका अपनाएं। दूसरे सप्ताह अपने शरीर को पहले गर्म करके फिर सौ की गिनती पूरी करते हुए एक फीट के लगभग ऊंचा कूदें। हर दिन दस अंक गिनती में बढ़ाएं। तीसरे सप्ताह भी रोज की तरह अपने शरीर को गर्म करके बिना रूके सौ की गिनती तक कूदें। दो तीन मिनट आराम करके सौ तक की गिनती करते हुए रस्सी कूदें। चौथे सप्ताह तक आपको रस्सी कूदने का पूरा अभ्यास हो जाएगा। अब आप लगातार पंद्रह से बीस मिनट तक रस्सी कूद सकती हैं। इस व्यायाम से आपका स्वास्थ्य ठीक रहेगा व शरीर की मांसपेशियां भी मजबूत बनेंगी। रस्सी कूदने को अपने जीवन का नियम बना लें, फिर देखिए कि आप कितनी स्वस्थ्य व हष्ट-पुष्ट रहेंगी।