प्रीपेड बिजली मीटर लगाना अनिवार्य नहीं: सरकार

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नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में कहा कि बिजली के प्रीपेड स्मार्ट मीटर वैकल्पिक व्यवस्था है और इसे अनिवार्य नहीं बनाया गया है।

खट्टर ने प्रश्नकार में आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सदस्य हनुमान बेनीवाल के पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए यह बात कही।

केंद्रीय मंत्री ने उपभोक्ताओं को प्रीपेड मीटर लगाने के लिए बाध्य किए जाने के कुछ सदस्यों के दावों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘प्रीपेड स्मार्ट मीटर वैकल्पिक व्यवस्था है और इसे अनिवार्य नहीं बनाया गया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘किसी प्रदेश में जबरन स्मार्ट मीटर लगाने का कोई समाचार नहीं। अगर कहीं से कोई शिकायत आती है तो संज्ञान लेंगे।’’

ऊर्जा मंत्री ने यह भी कहा कि कई जगहों पर लोग सालों तक बिजली के बिल नहीं भरते, ऐसे में उन्हें बाध्य करने के लिए प्रीपेड मीटर लगाने पर ही बिजली आपूर्ति की जाती है ताकि उनके बिल लंबित नहीं रहें।

उन्होंने कहा कि जहां-जहां प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं, वहां कंपनियों के घाटे खत्म हुए हैं और वे मुनाफे में आ गई हैं।

मंत्री ने कहा कि निजी बिजली आपूर्ति कंपनियां व्यावसायिक होती हैं और वे कोई सेवा कार्य नहीं कर रहीं।

उन्होंने कहा कि प्रीपेड मीटर लगाने से उपभोक्ताओं, राज्य और निजी कंपनियों, सभी को लाभ होता है।

उन्होंने यह भी कहा, ‘‘निजी बिजली कंपनियों के इतिहास में पहली बार पिछले साल सभी निजी कंपनियों ने कुल मिलाकर 2600 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया।’’

उन्होंने गरीबों और दैनिक कमाई पर आश्रित रहने वाले लोगों को प्रीपेड मीटर रिचार्ज करने संबंधी कठिनाई होने संबंधी एक पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि पांच से दस दिन के छोटे रिचार्ज के विकल्प भी उपलब्ध हैं।

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