पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के पास पर्याप्त संसाधन :विश्व बैंक

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नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) भारत मौजूदा वैश्विक ऊर्जा संकट का सामना करने के लिए अच्छी स्थिति में है, क्योंकि उसके पास पर्याप्त सुरक्षा उपाय हैं जिनमें उच्च विदेशी मुद्रा भंडार, राजकोषीय गुंजाइश और कम मुद्रास्फीति शामिल हैं। ये सभी चीजें वैश्विक चुनौतियों के बावजूद वृद्धि को समर्थन देंगी।

मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत करने के एक दिन बाद दक्षिण एशिया के लिए विश्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक (समृद्धि) सेबेस्टियन एकार्ट ने कहा कि भारत ने गत वित्त वर्ष 2025-26 में व्यापारिक उथल-पुथल का अच्छी तरह सामना किया और कच्चे तेल बाजारों में अस्थिरता उत्पन्न करने वाले मौजूदा पश्चिम एशिया संकट में भारतीय अर्थव्यवस्था ‘‘मजबूत स्थिति’’ से डटी है।

एकार्ट ने कहा, ‘‘ भारत के पास मजबूत नीतिगत उपाय, उच्च विदेशी मुद्रा भंडार, राजकोषीय क्षमता है जिससे जरूरत पड़ने पर सहायता प्रदान की जा सकती है। साथ ही यहां मुद्रास्फीति का स्तर कम है और मौजूदा संकट से निपटने के लिए मजबूत लक्ष्य हैं। इस मजबूत वृद्धि गति को यूरोपीय संघ के मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और नई श्रम नीति जैसी सकारात्मक नीतियों का समर्थन प्राप्त है। ये सभी चीजें निश्चित रूप से मजबूत वृद्धि गति को सुदृढ़ करती हैं एवं समर्थन देती हैं जो अच्छी बात है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद हम भारत और इस क्षेत्र को दुनिया के अन्य उभरते बाजारों की तुलना में एक बहुत मजबूत एवं बेहतर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र बने रहने की उम्मीद करते हैं।’’

विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान मामूली बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही उसने कहा कि पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न चुनौतियां वृद्धि पर असर डाल सकती हैं। हालांकि, माल एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में कटौती से शुरुआती महीनों में उपभोक्ता मांग को सहारा मिलेगा।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश की आर्थिक वृद्धि के 6.9 प्रतिशत, आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ने 6.1 प्रतिशत और मूडीज रेटिंग्स ने छह प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

विश्व बैंक ने बुधवार को जारी अपनी ‘दक्षिण एशिया आर्थिक अद्यतन रिपोर्ट’ में कहा कि भारत की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2024-25 के 7.1 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसका मुख्य कारण मजबूत घरेलू मांग और निर्यात की मजबूती है।

रिपोर्ट के अनुसार, निजी उपभोग में वृद्धि विशेष रूप से मजबूत रही जिसे कम मुद्रास्फीति एवं माल एवं सेवा कर के युक्तिकरण से समर्थन मिला।

विश्व बैंक ने कहा, ‘‘ वृद्धि दर के 2026-27 में घटकर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न प्रतिकूल परिस्थितियों को दर्शाता है।’’

रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी दरों में कटौती से वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में उपभोक्ता मांग को सहारा मिलेगा, लेकिन ऊंची वैश्विक ऊर्जा कीमतें महंगाई बढ़ा सकती हैं और परिवारों की उपलब्ध आय पर दबाव डाल सकती हैं।

इसके अलावा रसोई गैस एवं उर्वरक पर अधिक सब्सिडी खर्च के कारण सरकारी खपत वृद्धि में नरमी आने की उम्मीद है। बढ़ती अनिश्चितता तथा कच्चे माल की लागत में वृद्धि के कारण निवेश वृद्धि भी धीमी पड़ सकती है।

विश्व बैंक ने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय संघ के बाजारों तक भारत की निर्यात पहुंच में सुधार का लाभ मुख्य व्यापारिक साझेदार देशों में धीमी वृद्धि से कुछ हद तक प्रभावित हो सकता है।

विश्व बैंक ने जनवरी में जारी ‘वैश्विक आर्थिक संभावना रिपोर्ट’ में भारत की वृद्धि दर 2026-27 में 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।

रिपोर्ट में कहा गया कि पश्चिम एशिया संकट का असर अत्यधिक अनिश्चित है और अन्य एजेंसियों ने 2026-27 के लिए वृद्धि अनुमान 5.9 प्रतिशत से 6.7 प्रतिशत के बीच कर दिए हैं।

उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर सैन्य हमले किए थे जिसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की। हालांकि आठ अप्रैल को ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनी जिससे पश्चिम एशिया में फैले संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा बाजार में आई उथल-पुथल में कुछ राहत की उम्मीद जगी है।

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