एआई के दौर में छात्र अपना ज्ञान किताबों तक सीमित न रखें : उपराज्यपाल संधू

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नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और सतत नवाचार जैसी तकनीकों के दुनिया को नया आकार देने के बीच युवाओं से अपनी शिक्षा को सिर्फ डिग्रियों और किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखने की बृहस्पतिवार को गुजारिश की।

उपराज्यपाल ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (जीजीएसआईपीयू) के 18वें दीक्षांत समारोह में शिरकत की और विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं।

विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संधू ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज का युवा एक ऐसे दौर में कदम रख रहा है, जहां एआई और सतत नवाचार जैसी तकनीकें दुनिया को नया आकार दे रही हैं, इसलिए इस बदलते दौर में अपनी शिक्षा केवल डिग्रियों और किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखनी चाहिए, बल्कि इसमें भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप अनुकूलनशीलता, तार्किक सोच और नवाचार का साहस होना अनिवार्य है।

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, दीक्षांत समारोह के दौरान कुल 26,649 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें 22,932 स्नातक, 3,582 स्नातकोत्तर, 11 एम.फिल. और 124 पीएचडी डिग्रियां शामिल हैं। इस वर्ष की पीएचडी की डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में महिलाओं की 70 प्रतिशत भागीदारी रही। इसके अतिरिक्त, 76 गोल्ड मेडल और छह मेमोरियल अवॉर्ड्स भी मेधावी विद्यार्थियों को प्रदान किए गए।

संधू ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल एक शैक्षणिक यात्रा का समापन नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की दिशा में हजारों नई यात्राओं की शुरुआत है, इसलिए शिक्षा को केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि न मानकर, इसे समाज और राष्ट्र के प्रति एक जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।

सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह की महान शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि ज्ञान न्याय और सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली और भारत का भविष्य इन प्रतिभाशाली युवाओं के हाथों में सुरक्षित है, जो अपने साहस, उद्देश्य और समर्पण से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएंगे।

वहीं, मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि छात्रों के वर्षों के कठिन परिश्रम, अटूट समर्पण और कड़े अनुशासन का प्रतिफल है।

गुप्ता ने कहा कि आज स्नातक हो रहे युवा ही ‘विकसित भारत’ के स्वप्न को साकार करने वाले वास्तविक सारथी हैं तथा उनकी प्रतिभा और सामर्थ्य ही देश को वैश्विक पटल पर नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा का उपयोग न केवल व्यक्तिगत प्रगति के लिए, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए भी करें।

मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय द्वारा एआई, रोबॉटिक्स, डेटा साइंस और डिजाइन नवाचार जैसे क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

गुप्ता ने विशेष रूप से ‘अटल इन्क्यूबेशन सेंटर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि 170 से अधिक स्टार्टअप को समर्थन देकर विश्वविद्यालय युवाओं को ‘जॉब सीकर’ (नौकरी मांगने वालों) के बजाय ‘जॉब क्रिएटर’ (नौकरी सृजित करने वाला) बना रहा है।

मुख्यमंत्री ने मेडल व डिग्रियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा, “हमारे युवाओं को जिस तरह की शिक्षा चाहिए, जैसी सुविधाएं चाहिए, हमारी सरकार उसी पर फोकस कर रही है।“

गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य केवल स्कूलों को स्मार्ट बनाना ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा में भी विश्वस्तरीय सुविधाएं सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि छात्रों के वर्षों के कठिन परिश्रम, अटूट समर्पण और कड़े अनुशासन का प्रतिफल है।

जीजीएसआईपीयू के कुलपति महेश वर्मा ने विश्वविद्यालय की रिपोर्ट प्रस्तुत की। समारोह में दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के अध्यक्ष योगेश सिंह समेत अन्य लोग शामिल हुए।

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