अहंकार नीति बन जाए तो देश को दशकों पीछे धकेल दिया जाता है: राहुल

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नयी दिल्ली, छह अप्रैल (भाषा) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पश्चिम एशिया संकट के कारण एलपीजी की कथित किल्लत तथा शहरों से मजदूरों के कथित पलायन के विषय को लेकर सोमवार को सरकार पर निशाना साधा और कहा कि जब अहंकार नीति बन जाए तो अर्थव्यवस्था चरमराती है एवं देश दशकों पीछे धकेल दिया जाता है।

उन्होंने यह दावा भी किया कि सरकार ने इस संकट को लेकर भी वही नीति अपनाई जो उसने कोविड संकट के समय अपनाई थी।

राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “(प्रधानमंत्री) मोदी जी ने कहा था, एलपीजी संकट को कोविड की तरह संभालेंगे। और सच में वही किया। बिल्कुल कोविड के जैसे ही नीति शून्य, घोषणा बड़ी, और बोझ गरीबों पर है।”

उन्होंने कहा कि 500-800 रुपये की दिहाड़ी कमाने वाले प्रवासी मज़दूरों के लिए रसोई गैस पहुंच से बाहर हो गई है।

राहुल गांधी ने कहा, “रात को घर लौटते मज़दूर के पास चूल्हा जलाने तक के पैसे नहीं। नतीजा यह है कि वो शहर छोड़कर गांव की ओर भाग रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि जो मज़दूर कपड़ा मिलों और कारखानों की रीढ़ हैं, आज वही टूट रहे हैं।

कांग्रेस नेता ने दावा किया, “कपड़ा क्षेत्र पहले से आईसीयू में है। विनिर्माण दम तोड़ रहा है। और यह संकट आया कहां से? कूटनीति की मेज़ पर हुई उस चूक से जिसे सरकार आज तक स्वीकार नहीं करती।”

उन्होंने कहा कि जब अहंकार नीति बन जाए तो अर्थव्यवस्था चरमराती है, मज़दूर पलायन करते हैं, उद्योग बर्बाद होते हैं और देश दशकों पीछे धकेल दिया जाता है।

राहुल गांधी ने कहा, “सवाल एक ही है कि हर संकट में सबसे पहले गरीब क्यों मरता है? चुप मत रहो। यह सिर्फ़ गरीब का नहीं, हम सबका सवाल है।”

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