एफसीआरए विधेयक ‘दमनकारी’, विदेश नीति विफल, मछुआरे श्रीलंका के हमलों का सामना कर रहे: स्टालिन

0
sgthsdaz

नागरकोइल (तमिलनाडु), चार अप्रैल (भाषा) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने शनिवार को केंद्र द्वारा प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 को “दमनकारी” करार दिया और आरोप लगाया कि इसके जरिये अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से ईसाई सेवा संगठनों को निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने इस विधेयक को वापस लेने की मांग की।

विधानसभा चुनाव के लिए यहां एक रैली को संबोधित करते हुए एम के स्टालिन ने मछुआरों के लिए सहायता राशि बढ़ाने की घोषणा की।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने पहले मछली पकड़ने पर प्रतिबंध अवधि के दौरान विशेष राहत राशि पांच हजार रुपये से बढ़ाकर आठ हजार रुपये की थी, जिसे अब बढ़ाकर बारह हजार रुपये प्रति माह किया जाएगा। इसी तरह, मछली पकड़ने के काम में मंदी आने के दौरान सहायता राशि छह हजार रुपये से बढ़ाकर नौ हजार रुपये प्रति माह की जाएगी।

स्टालिन ने रैली में लोगों से पूछा, “क्या आप सभी खुश हैं?”

अन्य कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने नए आश्वासन भी दिए। उन्होंने कहा कि मछुआरा कल्याण बोर्ड की सदस्यता के लिए अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष की जाएगी।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि 70 से 75 वर्ष आयु वर्ग के सदस्यों को मौजूदा कल्याणकारी उपायों के अतिरिक्त मासिक पेंशन प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके नेतृत्व वाली द्रविड़ शैली की सरकार मछुआरों की सच्ची मित्र और करीबी सहयोगी रही है।

स्टालिन ने आरोप लगाया, “हालांकि, विदेश नीति की बागडोर अपने हाथों में रखने वाली भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार हमारे मछुआरों की रक्षा करने में विफल रही है। वह विदेश नीति में भी नाकाम रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी है कि भारत का अपने छोटे पड़ोसी देशों पर भी कोई प्रभाव नहीं रह गया है।”

उन्होंने दावा किया कि यह खेदजनक है कि भाजपा सरकार तमिलनाडु के मछुआरों को भारतीय मछुआरे नहीं मानती और ‘‘इसका परिणाम श्रीलंका की नौसेना द्वारा हमारे मछुआरों पर लगातार किए गए हमले हैं।’’

जब केंद्र में कांग्रेस सरकार के दौरान मछुआरों पर हमले हुए थे, तब मोदी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को “कमजोर” बताया था और कहा था कि अगर कोई मजबूत प्रधानमंत्री सत्ता में होता तो ऐसी घटनाएं नहीं होतीं।

मुख्यमंत्री ने कहा, “क्या यह अब हो रहा है या नहीं? यह वास्तव में हो रहा है। अब, क्या मोदी यह स्वीकार करेंगे कि वह एक कमजोर प्रधानमंत्री हैं? या वह इसे स्वीकार नहीं करेंगे? यह एकमात्र प्रश्न नहीं है और कई अन्य प्रश्न भी हैं, जिनमें मदुरै एम्स परियोजना भी शामिल है, जो लगभग एक दशक से ‘अधूरी’ पड़ी है।”

स्टालिन ने आरोप लगाया कि विदेशी अंशदान से जुड़े एफसीआरए संशोधन विधेयक “दमनकारी” है और यह अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से ईसाई संगठनों को निशाना बनाता है।

पूरे देश में ईसाई इस प्रस्तावित संशोधन से आक्रोशित हैं, जिसके पारित होने पर लाभार्थी-प्राप्तकर्ता-संस्था की मान्यता रद्द हो जाएगी और प्रमाण प्रस्तुत करने में देरी जैसी छोटी-मोटी गलतियों के लिए भी धनराशि वापस ली जा सकती है।

उन्होंने कहा कि यहां तक ​​कि अस्पतालों, स्कूलों और छात्रावासों को भी सरकार द्वारा अपने नियंत्रण में लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यहां तक ​​कि घरेलू और विदेशी स्रोतों से प्राप्त धन से निर्मित संस्थानों को भी अपने नियंत्रण में लिया जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *