टॉन्सिल गले की वो बीमारी है जो बच्चों व बड़ों दोनों को किसी भी आयु में हो सकती है। 14 साल से कम उम्र के बच्चों को इसका खतरा ज्यादा होता है। अक्सर हम गले में दर्द को नजरअंदाज करते हैं। यह नजरअंदाजी टॉन्सिलाइटिस बन सकती है।
क्या हैं टॉन्सिल्स
टॉन्सिल्स मुंह के अंदर गले के दोनों ओर बादाम के आकार के होते हैं जो गले के अंदर जाने वाली किसी भी बीमारी से हमारी रक्षा करते हैं। इन्हें शरीर का सिक्युरिटी गार्ड माना जाता है। अगर हमारे टॉन्सिल्स मजबूत होंगे तो हमारे शरीर में जाने वाली बीमारी को तो रोकेंगे ही, साथ ही स्वयं भी स्वस्थ रहेंगे।
अगर टॉन्सिल्स कमजोर हैं तो बीमारी को शरीर में प्रवेश करने से तो रोकने का प्रयास करेंगे पर बेचारे स्वयं बीमार हो जाएंगे। उनमें सूजन, लाली आने से दर्द भी होगा और बुखार भी। इसके अतिरिक्त खाने-पीने में मुश्किल भी। ऐसी अवस्था को टॉन्सिल कहते हैं।
टॉन्सिल्स में होने वाले इंफेक्शन को टॉन्सिलाइटिस कहते हैं। अगर टॉन्सिलाइटिस की समस्या लगातार बनी रहे तो ठीक नहीं। वैसे टॉन्सिलाइटिस की समस्या साल भर में कभी भी हो सकती है पर अधिकतर बदलते मौसम में ज्यादा परेशान करती है जैसे मार्च और सितम्बर-अक्तूबर में। इन महीनों में गले का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि इससे हमारा बचाव हो सके।
क्यों होता है टॉन्सिलाइटिस
– बहुत तेज गर्म खाना खाने से।
– बहुत अधिक ठंडा पानी पीने से या अधिक ठंडे पेय लेने से अधिक आइसक्रीम खाने से।
– अधिक मिर्च मसाले वाला भोजन करने से।
– प्रदूषण, धूल-मिट्टी से।
– रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से।
– लगातार कब्ज या पेट खराब होने से।
– टॉन्सिल्स कमजोर होने से।
लक्षण
– टॉन्सिल्स का बढ़ना और सूजन होना।
– गले के बाहर भी सूजन।
– गले में दर्द।
– कुछ भी खाने-पीने और निगलने में परेशानी।
– कान में दर्द।
– तेज बुखार।
– टॉन्सिल्स और गले का लाल होना।
– आवाज में बदलाव या भारीपन।
क्या करें
एलोपैथी में बार-बार परेशान करने वाले टॉन्सिलाइटिस का इलाज आपरेशन है।
समय रहते कुछ घरेलू उपचार भी प्रारंभ में कर सकते हैं तो लाभ मिलता है। आधा चम्मच हल्दी पाउडर एक गिलास गर्म दूध में मिलाकर पिएं। हल्दी एंटीबायॉटिक है और इंफेक्शन से बचाव करती है। लगातार महीने भर गर्म दूध हल्दी वाला रात्रि में सोने से पूर्व पिएं। हल्दी पाउडर को उबलते गर्म दूध में मिलाना है। उसे मिलाकर उबालना नहीं है।
एक चौथाई मुलेठी चूर्ण को आधा चम्मच शहद में रात्रि में सोने से पूर्व एक माह तक लें।
होम्योपैथिक और आयुर्वेद में इसका इलाज है। इसका इलाज विशेषज्ञ से मिलने के उपरान्त करें।
बढ़ाएं रोग प्रतिरोधक शक्ति
– भोजन सादा और हल्का गर्म खाएं।
– अधिक ठंडे पेयों का सेवन बहुत कम करें।
– ताजे फल, हरी सब्जियां और दालें नियमित लें।
– व्यायाम नियमित करें। ताजी हवा में प्राणायाम भी कर सकते हैं।
– पानी खूब पिएं।
– फ्रिज में रखा भोजन बार-बार गर्म करके न खाएं क्योंकि ऐसे भोजन में पोषक तत्व की कमी हो जाती है और इसका प्रभाव हमारे शरीर की शक्ति पर पड़ता है।
– अधिक खट्टे, तले हुए भोज्य पदार्थ न खाएं।
– सब्जियों का गर्म सूप भी रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है।
