रोइये और निरोग रहिये

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आँसू सिर्फ गम का इजहार करने के लिए ही नहीं बहाये जाते बल्कि इनके बहने से अनेक प्रकार की बीमारियों का भी शमन होता है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जो व्यक्ति आंसुओं की मदद से अपने गम या खुशी का इजहार नहीं करता, उसका मन ही बीमार हो जाता है।
आंसू में एक प्रकार की अद्भुत कीटाणुनाशक शक्ति होती है। ये आंखों में जमा गंदगियों को धोकर उसकी सफाई तो करते ही हैं, साथ ही बाहरी वातावरण से आंखों में पहुंचने वाले अदृश्य कीटाणुओं को भी नष्ट कर डालते हैं।
यद्यपि शौक से कोई रोना नहीं चाहता और चाहकर भी रोना आसान नहीं है परन्तु दया, करूणा, प्रेम, बिछोह आदि की अवस्था में आदमी अपने-आप को रोक नहीं पाता और आंखें बरबस ही बरस पड़ती हैं। इतने ही समय में टपक पड़ने वाले आंसू आंखों को स्वस्थ बनाये रखने में समर्थ होते हैं।
वैज्ञानिक विश्लेषणों के अनुसार आंसुओं में 94 प्रतिशत पानी होता है। मात्रा छह प्रतिशत रासायनिक तत्व होते हैं, जिसमें कुछ क्षार और लाइसोजाइम नामक रासायनिक यौगिक होता है। यह लाइसोजाइम ही है जिसमें कीटनाशक अद्भुत क्षमता निहित होती है।
लाइसोजाइम किसी न किसी रूप में उपस्थित रहकर हमारे खून को भी कीटाणुमुक्त रखने में मदद करता है. लाइसोजाइम में सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि जब तक कीटाणु जीवित रहते हैं, तब तक यह उनको नष्ट करने के प्रयास में लगा रहता है। इसमें कीटाणुओं को समाप्त करने के लिए लम्बे समय तक जूझते रहने की अद्भुत क्षमता होती है।
जब शब्द रूपी भावनाएं अपने मनोभावों को व्यक्त करने में असमर्थ हो जाती हैं, तब हमारी भावनाओं को आंसुओं द्वारा ही वाणी प्रदान होती है। आंखों से आंसुओं का निकलना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है परंतु स्वास्थ्य की दृष्टि से आंसू हंसी से भी अधिक अहमियत रखते हैं।
रोने के कई प्रकार होते हैं। कुछ लोग चुपचाप आंसू टपकाते रहते हैं तो कुछ हिचक-हिचककर रोते हैं। कुछ व्यक्ति दहाड़ें मारकर रोया करते हैं। आंसू तो सभी स्थितियों में ही निकलते हैं, लेकिन दहाड़ें मारकर रोने में मस्तिष्क पर भार पड़ता है और मस्तिष्क के अंदर दबा तनाव उसके प्रभाव से दूर हो जाता है।
रोने से फेफड़े खुल जाते हैं, मुंह धुल जाता हैं, आंखों की कसरत व सफाई हो जाती है और मिजाज ठीक हो जाता है। रूलाई आने पर अगर उसको रोकने का प्रयास किया जाता है तो जुकाम, अरूचि, चक्कर आना, आंखों में पीड़ा होना, हृदयाघात, उच्च या निम्न रक्तचाप का होना, गर्दन में अकड़न, धातुस्राव, आदि के रूप में अनेक उपद्रव हो सकते हैं।
आंसू हृदय में छिपी घनीभूत पीड़ा को बाहर निकालकर हमें स्वस्थ बनाते हैं, अतः इन्हें ‘संजीवनी, मोती आदि की संज्ञा भी दी जाती है। रोना स्वास्थ्य के लिये अत्यन्त लाभदायक है,अतः -‘रोइये और निरोग रहिए।‘ 

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