सौंदर्य और नारी का रिश्ता बादल और बिजली की भांति है। जहां सौंदर्य नारी को प्रकृति का अनुपम उपहार है, वहीं श्रृंगार नारी का आदिम स्वभाव और अधिकार है। हर युग में श्रृंगार के तौर-तरीके और सौंदर्य के मापदण्ड बदलते रहे हैं। जहां तक भारतीय महिलाओं के परम्परागत श्रृंगार प्रसाधनों का प्रश्न है, शायद बिंदिया ही सर्वाधिक लोकप्रिय श्रृंगार साधन है। भारत में बिन्दी लगाने की प्रथा बहुत प्राचीन है। इसका महत्त्व इसलिए और भी अधिक बढ़ जाता है क्योंकि महिलाएं इसको सुहाग-चिन्ह के रूप में इस्तेमाल करती हैं। अब तो फैशन के बदलते दौर में बिन्दिया एक आवश्यक श्रृंगार-प्रसाधन बन चुकी है। बिन्दिया के बिना ललाट श्रीहीन-सा लगता है। उचित रूप से लगाई गई बिन्दिया सुहाग-बोध को प्रकट करने के साथ मुखमण्डल के आकर्षण में भी चार चांद लगा देती है। अन्य सौंदर्य प्रसाधनों के इस्तेमाल की भांति बिन्दी लगाने की कला आना भी एक आवश्यक बात है। बिन्दी लगा लेने मात्रा से इस सज्जा की पूर्णता नहीं हो जाती। व्यक्तित्व के अनुरूप रंग, आकार और डिजाइन के चयन में ही इस श्रृंगार प्रसाधन की सार्थकता है। सबसे पहले हमें ललाट पर बिन्दी लगाने के सही स्थान के बारे में जानकारी होनी चाहिए। बिन्दिया लगाने का उपयुक्त स्थान ललाट पर शीर्ष ग्रन्थि (पिनिअल ग्लैण्ड) के ऊपर होता है। माथे पर हर कहीं बिन्दी चिपका लेने से आपका फूहड़पन तो झलकेगा ही, साथ ही आपके चेहरे का आकर्षण भी कम हो जाएगा। बिन्दी की मनोहर सजावट के लिए चेहरे की बनावट और रंग रूप का भी विशिष्ट स्थान होता है। जहां गेंहुए रंग पर गहरे लाल एवं कत्थई रंग की बिन्दिया फबती है, वहीं सांवले रंग के चेहरे पर सन्दली एवं बैंगनी रंग की बिन्दिया अधिक सुन्दर लगती है। श्याम वर्ण पर लाल, हरी, गुलाबी रंग की सुन्दर बिन्दिया खिलती हैं। गोलाकार मुखाकृतिवाली महिलाओं को लम्बी बिन्दिया लगानी चाहिए जबकि लम्बे मुख पर गोल बिन्दी अधिक आकर्षक लगेगी। अण्डाकार चेहरे पर दो छोटी-छोटी बिन्दी के ऊपर एक छोटी बिन्दी सौन्दर्य में वृद्धि करती है। छोटे आकार के चेहरे पर तिलक के आकार की लम्बी बिन्दी सुशोभित होती है। चौड़े ललाट के मध्य बिन्दी लगानी चाहिए। ललाट की चौड़ाई कम होने पर ठीक भौंहों के बीचों बीच बिन्दिया लगाइए। पतली धनुषाकार भौहों के बीचोंबीच छोटी सी बिन्दी बहुत ही खूबसूरत लगती है। बिन्दिया के आकार एवं रंगों के समुचित चुनाव से चेहरे एवं ललाट की स्थूल बारीक रेखाओं में बहुत आकर्षण उत्पन्न किया जा सकता है। वस्त्रों के रंगों के अनुरूप बिन्दिया का चयन भी आवश्यक है।