मां चंद्रघंटा की कृपा से बदल सकती है आपकी किस्मत! पूजा के बाद जरूर करें ये आरती — पढ़ें चमत्कारी कथा

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नई दिल्ली: चैत्र नवरात्रि 2026 का शुभारंभ होते ही पूरे देश में भक्ति और आस्था की लहर दौड़ पड़ी है। हर ओर माता रानी के जयकारे गूंज रहे हैं और श्रद्धालु पूरे मन से उनकी आराधना में लीन हैं।

नवरात्रि के इन नौ दिव्य दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, लेकिन तीसरे दिन पूजी जाने वाली मां चंद्रघंटा का महत्व बेहद खास माना गया है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा और आरती करने से मां अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं।


क्यों विशेष है मां चंद्रघंटा की पूजा?

मां चंद्रघंटा शौर्य, शांति और करुणा की अद्भुत संगम हैं। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की घंटी सुशोभित होती है, जिसकी दिव्य ध्वनि से नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं।

👉 कहा जाता है कि

  • उनकी पूजा से साहस और आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है

  • शुक्र ग्रह के दोष शांत होते हैं

  • घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है

  • जिनके विवाह में रुकावटें आ रही हों, उन्हें विशेष लाभ मिलता है

मां की कृपा से जीवन में नई ऊर्जा, नई दिशा और सफलता के द्वार खुलने लगते हैं।


📖 जानिए मां चंद्रघंटा की अद्भुत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव बारात लेकर माता पार्वती के द्वार पहुंचे, तो उनका रूप अत्यंत भयावह था—शरीर पर भस्म, गले में सर्प और विचित्र गणों के साथ उनका स्वरूप देखकर सभी भयभीत हो उठे।

तब माता पार्वती ने अपने परिवार और संसार को भयमुक्त करने के लिए एक तेजस्वी और दिव्य रूप धारण किया — यही रूप मां चंद्रघंटा के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

एक अन्य कथा के अनुसार, जब असुरों का अत्याचार बढ़ गया, तब मां चंद्रघंटा ने अपने प्रचंड रूप से उनका संहार किया। उनकी घंटी की ध्वनि मात्र से दुष्ट शक्तियां कांप उठती थीं और नष्ट हो जाती थीं।

👉 इसीलिए मां चंद्रघंटा को रक्षा और शक्ति की देवी भी कहा जाता है।


🕉️ मां चंद्रघंटा को प्रसन्न करने के लिए मंत्र

ऐं श्रीं शक्तयै नमः।
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः।
पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
या देवी सर्वभू‍तेषु मां चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥


🔔 मां चंद्रघंटा की आरती (पूजा के बाद जरूर पढ़ें)

जय मां चंद्रघंटा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे सभी काम।

चंद्र समान तुम शीतल दाती।
चंद्र तेज किरणों में समाती।
क्रोध को शांत करने वाली।
मीठे बोल सिखाने वाली।

मन की मालक मन भाती हो।
चंद्रघंटा तुम वरदाती हो।

सुंदर भाव को लाने वाली।
हर संकट में बचाने वाली।

हर बुधवार जो तुझे ध्याए।
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाए।

मूर्ति चंद्र आकार बनाए।
सन्मुख घी की ज्योत जलाए।

शीश झुका कहे मन की बाता।
पूर्ण आस करो जगदाता।

कांचीपुर स्थान तुम्हारा।
करनाटिका में मान तुम्हारा।

नाम तेरा रटूं महारानी।
भक्त की रक्षा करो भवानी।


🚩 एक छोटी सी मान्यता, जो बदल सकती है आपकी जिंदगी

अगर आप नवरात्रि के तीसरे दिन सच्चे मन से मां चंद्रघंटा की पूजा कर उनकी आरती करते हैं, तो जीवन के बड़े से बड़े संकट भी दूर हो सकते हैं और घर में सुख-शांति का वास होता है।

🙏 जय माता दी 🙏