सुन्दर दिखने व सुन्दर बने रहने की चाह प्रत्येक व्यक्ति में हमेशा से रही है। यह लालसा प्राचीनकाल में भी थी, आज भी है। सौन्दर्य प्रकृति की अनुपम देन है। सुन्दर पुरुष की ओर स्त्रियां और सुन्दर स्त्रियों की ओर पुरुष स्वाभाविक ही आकर्षित होते हैं। यह प्राकृतिक स्वभाव ही है। वैसे ही स्त्री के सभी शारीरिक अंग किसी न किसी वस्तु से तुलना करने पर उपमा के काबिल माने जाते हैं जैसे-काले लंबे घुंघराले बाल, सुराहीदार गरदन, तिरछी नजर, पैनी भौंहें, गुलाबी होंठ, पतली कमर, खिलता हुआ चेहरा, धूप सा सफेद रंग इत्यादि लेकिन जहां तक पतली कमर का प्रश्न है, वह आज अपना अस्तित्व खोती जा रही है। आज की नारी-सौन्दर्य में उसकी कटि धीरे-धीरे सभ्यता के विकास के साथ अपना आकर्षण लुप्त-सा करती जा रही है। शहरी विकास और आधुनिकीकरण से पतली और लचकदार कमर कम ही दिखलाई पड़ती है। शहर के हर क्षेत्र में प्रायः बाजार, होटल, सिनेमाघर, सड़क और पार्कों में जिधर देखो, मोटी कमर और उसके आगे मोटा-सा पेट दिखलाई देता है। पेट मानो ढोल का सा एहसास दिलाता है। महिलाएं मोटापे को सुख, समृद्धि व सौभाग्य की निशानी समझती हैं। स्वयं को खाते-पीते घर की कहती हैं। इस मोटापे का मुख्य कारण अधिक गरिष्ठ भोजन करना, परिश्रम न करना, समय पर न खाना, व्यायाम आदि न करना है। चर्बी जब पेट के चारों ओर जम जाती है तब कमर व पेट को बेडौल बनाती है। इससे धीरे-धीरे चलते-फिरने, सीढ़ी चढ़ने, सांस लेने व दैनिक कार्य करने में अड़चन पैदा होती है। कमर में दर्द इसी कारण होता है। जब कमर की चर्बी का अतिरिक्त वजन कमर की पेशियां संभाल नहीं पाती तो दर्द शुरू हो जाता है। अतः चिकनाई का प्रयोग कम करें। ताजे फल व हरी-सब्जियां लें। भोजन की मात्रा कम करें। दिन में सोना छोड़ दें। प्रातः जल्दी उठें। व्यायाम व योग करें। आलस्य न करें। घर के कार्य स्वयं करें। सख्त तख्त पर या जमीन पर सोएं । आरामदायक मोटे गद्दे का प्रयोग न करें।