महिलाएं सशक्त हैं, दूसरों से कमतर नहीं होतीं: राष्ट्रपति मुर्मू

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नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महिलाओं की ताकत और उपलब्धियों की रविवार को सराहना करते हुए उन्हें उनकी पूरी क्षमता का एहसास कराने के लिए प्रोत्साहित कियास। मुर्मू ने कहा, ‘‘हम किसी से कमतर नहीं हैं।’’

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह अवसर न केवल महिलाओं की उपलब्धियों को सम्मानित करने का है, बल्कि उनके सशक्तीकरण के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता को भी दोहराने का है।

मुर्मू ने शिक्षा, प्रशासन, न्यायपालिका, सशस्त्र बलों, चिकित्सा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कला, उद्यमिता और खेल में महिलाओं की अग्रणी भूमिकाओं पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और ग्राम विकास में नेतृत्व प्रदान कर रही हैं, वहीं महिलाएं रोजगार, स्टार्टअप और कॉर्पोरेट क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘अवसर और समर्थन मिलने पर महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं।’’

मुर्मू ने कहा, ‘‘महिलाओ में दम है, हम किसी से कम नहीं। हममें भी दम है।’’

राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि यद्यपि कई उपलब्धियां हासिल की गई हैं, फिर भी समाज में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करने में कई बाधाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इन चुनौतियों का समाधान केवल कानून से नहीं हो सकता। हमें अपनी सोच बदलनी होगी।’’

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि माता-पिता को घर में बेटियों और बेटों के बीच भेदभाव नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सास को अपनी बेटियों और पुत्रवधू के बीच भेदभाव नहीं करना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘सच्ची समानता की शुरुआत हर महिला को बेटी के रूप में मान्यता देने से होती है, चाहे परिवार में उसकी भूमिका कुछ भी हो।’’

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस समारोह के अंतर्गत रविवार को आयोजित ‘शक्ति वॉक – शी लीड्सभारत’ के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को बधाई दी।

मुर्मू ने इस कार्यक्रम में भाग लेने वाली देशभर की महिलाओं के समर्पण की भी सराहना की और भारत की प्रगति और देशभर में महिलाओं के सशक्तीकरण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को उजागर किया।

डॉ. बी. आर. आंबेडकर के शब्दों को याद करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘मैं किसी समुदाय की प्रगति को इस आधार पर मापती हूं कि महिलाओं ने कितनी प्रगति हासिल की है।’’

राष्ट्रपति ने संतोष व्यक्त किया कि भारत सरकार ने महिला सशक्तीकरण को प्राथमिकता देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ; सुकन्या समृद्धि योजना; प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना; प्रधानमंत्री मुद्रा योजना; मिशन शक्ति और विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) समेत विभिन्न कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला, जिनमें महिला-केंद्रित प्रावधान शामिल हैं।

उन्होंने एसटीईएम शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नेतृत्व की भूमिका निभाने और ‘स्किल इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी योजनाओं के बारे में भी बात की।

मुर्मू ने कहा कि महिलाएं रोजगार सृजन में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले साल महिला कामगारों के लिए अधिक समावेशी, सुरक्षित और सशक्त कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के लिए श्रम संहिताएं लागू की गईं।’’

राष्ट्रपति मुर्मू ने नागरिकों से प्रत्येक बालिका को शिक्षा, सम्मान और अवसर प्रदान करने का संकल्प लेने, ‘‘महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता देने और समाज में भेदभाव के सभी रूपों को समाप्त करने का प्रयास करने’’ का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा करके हम दुनिया के सामने महिला सशक्तीकरण का एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत कर सकते हैं।’’

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