अमेरिका-भारत के बीच व्यापार समझौता लगभग अंतिम चरण में है: अमेरिकी उपविदेश मंत्री

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नयी दिल्ली, पांच मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में संकट के बाद कच्चे तेल की आपू्र्ति में व्यवधान की आशंकाओं के बीच अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने बृहस्पतिवार को कहा कि अमेरिका भारत की अल्पकालिक और दीर्घकालिक ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उसके साथ मिलकर काम करेगा।

फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित संकरे जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान द्वारा लगभग अवरुद्ध कर दिए जाने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। वैश्विक तेल और एलएनजी (द्रवीकृत प्राकृतिक गैस) का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी जलडमरूमध्य के जरिये ले जाया जाता है।

भारत कच्चे तेल की अपनी 88 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस की लगभग 50 प्रतिशत आवश्यकता की पूर्ति आयात से करता है। ज्यादातर आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होती है।

रायसीना डायलॉग में लैंडौ ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि भारत वैकल्पिक स्रोतों के बारे में सोच रहा है। मुझे अमेरिका से बेहतर कोई वैकल्पिक स्रोत नहीं दिखता, हम भारत के साथ सहयोग करना चाहते हैं।”

उन्होंने कहा, “हम आपके साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि आपकी अल्पकालिक और दीर्घकालिक ऊर्जा आवश्यकताएं पूरी हों।”

लैंडौ ने भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते का भी जिक्र किया और कहा कि यह ‘‘अब लगभग अंतिम चरण में है।’’

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