कोच्चि, 22 मार्च (भाषा) केरल विधानसभा चुनाव में परवूर सीट पर कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के प्रमुख नेता वी डी सतीशन और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता ई टी टायसन मास्टर के बीच होने वाला मुकाबला विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस सीट का नतीजा न केवल सतीशन के राजनीतिक कद, बल्कि राज्य में यूडीएफ की संभावनाओं के लिहाज से भी अहम है।
वी डी सतीशन को जब 2021 में केरल विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना गया था तब इसे यूडीएफ द्वारा 2026 के चुनाव से पहले अपनी जीत की संभावनाओं को फिर से मजबूत करने के एक प्रयोग के रूप में देखा गया।
कई विश्लेषकों का मानना था कि दूसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाल रहे पिनराई विजयन जैसे नेता को चुनौती देना एक ऐसे नेता के लिए आसान नहीं है जो छात्र राजनीति से शुरुआत कर कांग्रेस में पदाधिकारी बना हो लेकिन केरल ने एक ऐसे प्रखर रणनीतिकार को उभरते देखा जिसने यूडीएफ को कई उपचुनावों, लोकसभा चुनाव और बाद में स्थानीय निकाय चुनावों में जीत दिलाई।
अब सवाल यह है कि क्या सतीशन राज्य में नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में इस सफलता को अपने निर्वाचन क्षेत्र परवूर और पूरे राज्य में दोहरा पाएंगे।
परवूर से वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के उम्मीदवार और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता ई टी टायसन मास्टर ने दावा किया कि वह यूडीएफ के संभावित मुख्यमंत्री चेहरे को उनके घरेलू मैदान पर हराएंगे।
एर्नाकुलम जिले की इस तटीय सीट पर 1.91 लाख से अधिक मतदाता हैं और शुरुआत में कुछ समय के लिए भाकपा के दबदबे के बाद यह सीट कांग्रेस का गढ़ रही है।
यह निर्वाचन क्षेत्र 2001 से कांग्रेस के कब्जे में है। उस समय सतीशन ने इसे जीतकर दशकों पुराने वामपंथी प्रभुत्व का अंत किया था।
केरल स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) के नेता रहे और उच्च न्यायालय में वकालत करने वाले सतीशन की परवूर में राजनीतिक यात्रा 1996 में भाकपा नेता पी राजू से हार के साथ शुरू हुई थी।
उन्होंने इस हार से निराश हुए बिना निर्वाचन क्षेत्र में लगातार काम किया और बाद में मजबूत जमीनी आधार बनाया और धीरे-धीरे उनकी छवि एक सहज एवं सुलभ नेता की बन गई।
इस निरंतर सक्रियता का नतीजा 2001 में चुनावी सफलता के रूप में सामने आया और वह लगातार पांच बार इस सीट से चुनाव जीते। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने 82,000 से अधिक मत हासिल किए थे और भाकपा के एम टी निक्सन को 21,000 से अधिक मतों से हराया था।
सतीशन ने हाल में इस निर्वाचन क्षेत्र में एक रोडशो को संबोधित करते हुए कहा था कि परवूर के लोगों ने उन्हें लगातार बड़े अंतर से जिताया है।
सतीशन ने कहा था, ‘‘यहां के लोग मेरे परिवार जैसे हैं।’’
परवूर में कांग्रेस नेता रेजी ने कहा कि कोई भी पार्टी कार्यकर्ता नतीजे को लेकर चिंतित नहीं है, सबकी नजर केवल बढ़त के अंतर पर है।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि इस बार सतीशन को 30,000 से अधिक अंतर से जीत मिलेगी।’’
भाकपा के वरिष्ठ नेता एवं काइपामंगलम से मौजूदा विधायक टायसन मास्टर नौ अप्रैल के विधानसभा चुनाव में सतीशन की जीत के रथ को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
पेशे से स्कूल शिक्षक मास्टर ने कहा कि चुनाव प्रचार आगे बढ़ने के साथ-साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता जा रहा है। वरिष्ठ नेता ने एलडीएफ सरकार द्वारा लागू की गई व्यापक विकास पहलों के दम पर जीत मिलने की उम्मीद जताई।
मास्टर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘दूसरे निर्वाचन क्षेत्रों की तुलना में परवूर में पर्याप्त विकास होने को लेकर संदेह है इसलिए मैं लोगों को स्पष्ट रूप से बता रहा हूं कि मैं यहां कौन-कौन से विकास कार्य करूंगा और क्या बदलाव लाऊंगा तथा मैं उसी आधार पर वोट मांग रहा हूं।’’
भाकपा नेता ने कहा कि हालांकि वह काइपामंगलम से विधायक हैं लेकिन परवूर से उनका करीबी संबंध है क्योंकि उन्होंने यहीं के एक स्कूल शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया था।
इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी परवूर में एक मजबूत उम्मीदवार वत्सला प्रसन्नकुमार को मैदान में उतारा है।
इस निर्वाचन क्षेत्र में उत्तरी परवूर नगर पालिका और सात पंचायतें शामिल हैं।
