पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित नहीं होने की उम्मीद: टाटा समूह चेयरमैन

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जमशेदपुर, चार मार्च (भाषा) टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने मंगलवार को उम्मीद जतायी कि ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी संघर्ष का आपूर्ति श्रृंखला पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि समूह ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से उत्पन्न होने वाले जोखिमों को कम करने की योजना बनाई है।

चंद्रशेखरन ने पश्चिम एशिया में कार्यरत टाटा समूह की कंपनियों के कर्मचारियों की सुरक्षा का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा, ‘‘वैश्विक स्तर पर काफी अनिश्चितता की स्थिति है। पिछला साल भी काफी कठिन रहा। मुझे लगता है कि हालात जल्द ही सामान्य हो जाएंगे और मुझे उम्मीद है कि आपूर्ति श्रृंखला में कोई समस्या नहीं आएगी।’’

चंद्रशेखरन ने कहा, ‘‘भू-राजनीतिक स्थिति में अनिश्चितता को देखते हुए, हमने न केवल टाटा समूह बल्कि देश के लिए भी मौजूदा स्थिति से उत्पन्न होने वाले जोखिमों को कम करने की योजना बनाई है।’’

चंद्रशेखरन टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा और टाटा स्टील के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक टी वी नरेंद्रन तथा समूह की विभिन्न कंपनियों के प्रमुखों के साथ टाटा स्टील के संस्थापक जमशेदजी नुसरवानजी टाटा की 187वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए यहां उपस्थित थे।

उन्होंने कहा कि टाटा स्टील पश्चिम एशिया से चूना पत्थर खरीदती है और उसके पास पर्याप्त भंडार है।

उन्होंने कहा, ‘‘टाटा स्टील वैकल्पिक स्रोतों से भी चूना पत्थर खरीदेगी। हमें विश्वास है कि इससे कोई समस्या नहीं होगी।’’

टाटा समूह के चेयरमैन ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा अब उनकी प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे कर्मचारी वहां सेवा कंपनियों और होटल में काम कर रहे हैं। एयर इंडिया के विमान उड़ान भर रहे हैं। हमारी मुख्य प्राथमिकता हमारे कर्मचारियों की सुरक्षा है। हमारा समूह पिछले तीन दिनों से सक्रिय है। सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं।’’

चंद्रशेखरन ने स्वीकार किया कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए कारोबार में कुछ उतार-चढ़ाव आ सकते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर कारोबार कुछ दिनों या महीनों के लिए प्रभावित होता है, तो उससे उबर लिया जाएगा, लेकिन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता हमारे कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा है। हम नागरिकों की सुरक्षा, जोखिम कम करने, कर्मचारियों की सुरक्षा और कारोबार की निरंतरता, आपूर्ति प्रणाली और अपने ग्राहकों के लिए योजना बना रहे हैं।’’

कृत्रिम मेधा पर एक प्रश्न का उत्तर देते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि एआई टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के लिए बहुत सारे अवसर प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि जब भी कोई नई प्रौद्योगिकी आती है तो लोगों को चिंता होने लगती है कि सब कुछ मशीनों से होने लगेगा और नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी।

चंद्रशेखरन ने कहा कि यह चर्चा भी होती है कि कौन-सा कारोबार आगे बढ़ेगा और कौन-सा पीछे रह जाएगा। लेकिन टाटा स्टील और टाटा मोटर्स जैसी कंपनियां नई प्रौद्योगिकियों को अपनाकर उनका पूरा लाभ उठा रही हैं। कृत्रिम मेधा के क्षेत्र में टीसीएस के पास बहुत बड़े अवसर हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि समूह के व्यवसायों का विस्तार हो रहा है।

उन्होंने बताया कि पांच वर्ष पहले समूह के कर्मचारियों की संख्या लगभग 7.5 लाख थी और आज यह 11 लाख से अधिक हो गई है।

उन्होंने कहा कि विस्तार योजना के कारण कई नई फैक्टरी से जुड़ी नौकरियां आ रही हैं। आने वाले पांच–छह साल में कर्मचारियों की संख्या 15 लाख तक पहुंच सकती है।

चंद्रशेखरन ने कहा, ‘‘हमें हर क्षेत्र के कुशल और युवा लोगों की जरूरत है। साथ ही, समूह कौशल विकास में भी निवेश कर रहा है।’’

उन्होंने कहा कि उन्हें जमशेदपुर आकर खुशी हो रही है।

उन्होंने कहा कि टाटा स्टील इस मई में अपने 120 साल पूरे करेगी और नई प्रौद्योगिकी के साथ लगातार आगे बढ़ रही है।

चंद्रशेखरन ने कहा कि जमशेदपुर में टाटा मोटर्स हाइड्रोजन से जुड़ी नई प्रौद्योगिकी पर भी निवेश कर रही है।

उन्होंने बताया कि टाटा पावर भी नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में टाटा स्टील और टाटा मोटर्स के साथ मिलकर काम बढ़ा रही है।

टाटा समूह के चेयरमैन ने बताया कि बहुत से काम चल रहे हैं और हम इस पूरे तंत्र का हिस्सा बनकर आगे बढ़ना चाहते हैं।

सोमवार को रांची में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से हुई मुलाकात को उन्होंने सकारात्मक बताया।

उन्होंने बताया, ‘‘हमने कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए 11,000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है।’’

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