मुंबई, 23 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारतीय मानक बॉन्ड प्रतिफल सोमवार को 14 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया।
सोमवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल 6.8173 प्रतिशत रहा जबकि शुक्रवार को यह 6.737 प्रतिशत पर बंद हुआ था। बाजार भागीदारों से संकलित आंकड़ों के अनुसार यह 14 जनवरी 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
एरीटे कैपिटल (चॉइस समूह) में उपाध्यक्ष माताप्रसाद पांडे ने कहा, ‘‘ अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने के बाद बॉन्ड प्रतिफल बढ़ रहा है। जनवरी और फरवरी में सरकारी बॉन्ड के शुद्ध खरीदार रहे विदेशी संस्थागत निवेशक मार्च में शुद्ध विक्रेता बन गए हैं।’’
उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें न केवल मुद्रास्फीति की चिंता बढ़ा रही हैं बल्कि भारत के व्यापार एवं चालू खाते के संतुलन पर भी दबाव डाल रही हैं, जो पहले से कमजोर हो रहे रुपये के लिए बड़ा नकारात्मक कारक है और यह 94 के स्तर की ओर बढ़ रहा है।
पांडे ने कहा, ‘‘ ये कारक न केवल ब्याज दर में कटौती की उम्मीदों को कम करते हैं बल्कि यदि भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो दरों में बढ़ोतरी की संभावना भी बढ़ाते हैं। इसके परिणामस्वरूप मांग की तुलना में आपूर्ति बढ़ने से बॉन्ड की कीमतों पर नकारात्मक दबाव पड़ रहा है।’’
पश्चिम एशिया में संघर्ष का यह चौथा सप्ताह है। इस संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है और ऊंची मुद्रास्फीति की आशंका बढ़ गई है।
तेल की कीमतों में तब तेज उछाल आया जब ईरान ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 48 घंटे के भीतर ईरान के बिजली ग्रिड पर हमला करने की अपनी धमकी को अमल में लाने पर वह खाड़ी क्षेत्र के पड़ोसी देशों की ऊर्जा और जल प्रणालियों पर हमला करेगा।
ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 112.66 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रही है। फरवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने के बाद से इसमें लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने रुपये पर भी दबाव डाला है जिससे बाजार में कारोबारियों और निवेशकों की धारणा कमजोर हुई है।